Marital Dispute Law : पतिपत्नी विवाद आजकल दोचार महीने नहीं, बल्कि दसपंद्रह साल तक चलते रहते हैं. यदि दोनों को एकदूसरे पर बहुत ‘कृपा’ हो, तो कानूनी लड़ाई बहुत ही भयंकर हो सकती है. एक मामले में पतिपत्नी ने एकदूसरे पर 40 से ज्यादा मुकदमे दायर दिए हैं. हाईकोर्ट की फटकार के बाद दोनों ने कुछ मुकदमे वापस लेने पर सहमति दर्शाई है पर सभी वापस हो सकेंगे, जरूरी नहीं है.

इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने एक मामले में फैमिली कोर्ट का बच्चे को तलाक के मुकदमे के दौरान बोर्डिंग स्कूल भेज देने के फैसले को गलत ठहराया है. पतिपत्नी दोनों ही कस्टडी चाहते थे. दिनेश कुमार अग्रवाल व दीप्ति गोयल का विवाह 2013 में हुआ, 2019 में बेटा पैदा हुआ. मां अपने बेटे को धनबाद से ले कर लखनऊ चली गई. वर्ष 2020 में पिता मां के पीछे से बच्चे को अपने साथ ले गया तो मां ने कोर्ट में दावा ठोक दिया.

हाईकोर्ट ने 2022 में बेटे को मां को दिलवा दिया. इस पर पिता ने दबाव डाला कि बच्चे को बोर्डिंग स्कूल में डाला जाए. जनवरी 2026 में हाईकोर्ट ने पिता की बोर्डिंग स्कूल की मांग को ठुकराते हुए कहा कि पतिपत्नी नाहक बच्चे को फुटबौल की तरह इस्तेमाल कर रहे हैं.

इस दौरान बच्चे को ले कर विवाद खड़ा किया गया, दहेज का मामला बनाया गया, मेंटिनैंस का विवाद बनाया गया. असल में जनवरी 2026 में जब हाईकोर्ट इस मामले को सुन रही थी तो उस ने तलाक का जिक्र क्यों नहीं किया, यह अस्पष्ट है.

एक बार मामला सुप्रीम कोर्ट में भी गया पर वहां भी अंतिम निबटारा नहीं किया गया जबकि सुप्रीम कोर्ट अनुच्छेद 142 के अधिकार का उपयोग कर दोनों पक्षों को तलाक दिला कर मां को बच्चे की कस्टडी दिला सकती थी.

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