Majority and Minority : जो कुछ भारत का भगवा गैंग पिछले 30-40 सालों से देश में मुसलिमों और उन की मसजिदों, मजारों, मदरसों, वक्फों के साथ कर रहा है वैसा ही अब बंगलादेश में होने लगा है जहां अभी भी 13-14 फीसदी हिंदू हैं और अब तक चैन से जी रहे थे. 1971 से पहले कराची और इसलामाबाद से चलने वाली संयुक्त पाकिस्तानों की सरकारों और 1971 में भारत की इंदिरा गांधी की सहायता से बनी बंगलादेश सरकार से कोई खास परेशानी बंगलादेशी हिंदुओं को नहीं हुई.

काफी समय से भारत में हिंदूमुसलिम-हिंदूमुसलिम हो रहा है, सो, बंगलादेश में इस की गूंज उठनी ही थी. शेख हसीना ने लोकतंत्र को जमीन में गाड़ कर तानाशाही सरकार कुछ भारत भरोसे, कुछ आर्मी के सहारे 2009 से 2024 तक चला लिया लेकिन जब उन्होंने कट्टर मुसलिमों को रजाकार कहना शुरू किया तो भारत के भगवाओं की तरह वहां के रजाकारों ने न केवल उन्हें ढाका से निकाल फेंका, बल्कि अब वे पश्चिमी पाकिस्तानियों और भारत के भगवाइयों की तरह हिंदूमुसलिम भी करने लगे हैं.

धर्म के नाम पर राजनीति करना हमेशा खतरनाक होता है पर शासकों को यह हमेशा सहज और सरल लगता है क्योंकि धर्म के एजेंट गांवगांव, महल्लेमहल्ले में फैले होते हैं. जिस के साथ धर्म के दुकानदार होते हैं उस की सरकार लंबी चलती है. पाकिस्तान, अफगानिस्तान, ईरान में यही हो रहा है और अब तो दुनिया के सब से समर्थ शक्तिशाली लोकतंत्र अमेरिका में भी यही हुआ है कि चर्च के समर्थन पर डोनाल्ड ड्रंप सत्ता में हैं.

बंगलादेश के हिंदुओं पर हो रहे हमलों को नहीं रोका गया तो स्थिति पूरे महाद्वीप में गड़बड़ा सकती है. भारत आज पाकिस्तान और बंगलादेश से बहुत मजबूत स्थिति में है पर जैसे यूक्रेन ने अपने से चारगुनी बड़ी आबादी वाले रूस की नाक में दम कर रखा है, पाकिस्तान और बंगलादेश मिल कर, अगर वे कभी मिल गए तो, भारत के कई राज्यों में स्थिति को काफी डांवांडोल कर सकते हैं.

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