अगर मोटर वाहनों को रामरथ बनाने से देश का कल्याण होता तो 1988 से 2004 के दौरान और 2014 के बाद औटो उद्योग को दोगुनाचारगुना फलनाफूलना चाहिए था. जिस तरह से भरभर कर तीर्थयात्राएं की जा रही हैं, कांवडि़ए ट्रकों, टैंपुओं में भरभर कर गातेबजाते रातभर सड़कों पर चलते हैं, मंदिरों के सामने पार्किंग की समस्या पैदा हो रही है, ऐसे में औटो उद्योग को तो सोना बरसने की उम्मीद होनी चाहिए, लेकिन चिंतनीय यह है कि लगभग सब से पुरानी कंपनी टाटा मोटर्स को 2019-20 की पहली तिमाही में 3,680 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ है.

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