सरकारी प्रयोगों के कारण देश की अर्थव्यवस्था बुरी तरह लड़खड़ाने लगी है. पहले नोटबंदी, फिर कालेधन का हल्ला और अब जीएसटी के भूत के कारण उत्पादक शक्ति व्यापार संभालने में लग रही है. नेता और अफसर शायद खुश हो रहे होंगे कि उन्होंने आखिर जनता को नचा कर रख दिया और स्वच्छ सरकार बनाने का असली प्रसाद चखा दिया है.

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