कंपनियों व फर्मों के पार्टनरों में विवाद होना आम बात है पर जब कंपनी पति पत्नी ने मिल कर शुरू की हो और विवाद हो जाए तो स्थिति गंभीर व रोचक दोनों हो जाती है. भू सिग्मा नाम की डेटा एनालिसिस करने वाली एक सफल कंपनी में पतिपत्नी धीरज राजाराम और अंबिगा राजाराम की 47 प्रतिशत की हिस्सेदारी है. इस कंपनी की संपत्ति डेढ़ अरब रुपए आंकी जाती है. 71 साल से दोनों ने कंपनी को अपने खूनपसीने से सींचा था. पर अब पतिपत्नी विवाद भी है और कंपनी विवाद भी. पतिपत्नी विवादों में आमतौर पर घर, बैंक बैलेंस, गाडि़यां, जेवर आदि की गिनती की जाती है पर इस विवाद में दोनों की कंपनी भी शामिल है. कंपनी के शेष हिस्सेदार व खरीदार चिंतित हैं कि उन का क्या होगा.
पतिपत्नी मिल कर काम करें और फिर उन में विवाद हो जाए, इस पर अनूठी फिल्म ‘सौदागर’ बनी थी जिस में अमिताभ बच्चन ने गुड़ बेचने वाले का रोल निभाया था पर वह गुड़ बिकता इसलिए था क्योंकि उस में उस की पत्नी बनी नूतन की मेहनत थी. अमिताभ को एक लड़की पद्मा खन्ना भा जाती है और वह गुड़ बेच कर हुई कमाई से मेहर चुका कर पद्मा खन्ना से निकाह कर लेता है और नूतन को अकारण तलाक दे देता है. रोमांस तो ठीक पर जब गुड़ बनाने की बात आती है तो पद्मा खन्ना बुरी तरह फेल हो जाती है. पतिपत्नी संबंधों में अकसर दोनों भूल जाते हैं कि जीवन को सुखी बनाने में एकदूसरे का कितना साथ रहा था. जो पतिपत्नी लड़तेझगड़ते दिखते हैं, उन दोनों ने भी कितने ही काम खुशीखुशी किए होते हैं. जिन जोड़ों के पहले विवाह पूर्व प्रेम रहे हों या विवाह बाद प्रेमसंबंध बने हों, वे भी असल में एकदूसरे पर पूरी तरह निर्भर रहते हैं. यदि वे अलग होते हैं तो आमतौर पर दोनों की मूर्खता के कारण.
5-7 साल एक छत के नीचे रहने व एक बिस्तर पर सोने के बाद संबंधों में खटास आनी ही नहीं चाहिए. एकाधिकार की भावना, एकदूसरे को नियंत्रित करने की कोशिश और हर समय मीनमेख निकालना आदि खटास के कारण हो सकते हैं. हालांकि उन की आवश्यकता होती ही नहीं है क्योंकि वैवाहिक जोड़े ‘जैसे हैं, वैसे हैं’ के आधार पर बनते हैं, ‘मेड टू और्डर’ पर नहीं. इन को फैक्टरी में भेज कर ठीक नहीं कराया जा सकता है
जहां बच्चों या पत्नी के साथ मिल कर बनाई कंपनी हो, वहां तो अलग होने की सोची भी नहीं जानी चाहिए. चाहे उन में से एक कितना ही गलत क्यों न हो. केवल हिंसा ही एक कारण हो सकती है संबंध तोड़ने का. अंबिगा और धीरज राजाराम को यह बात क्यों समझ नहीं आई, यह समझ से परे है.