पहले गलत कर्म कर के बाद में जीतेजी जब उसका परिणाम मिलने लगे तो ऐसा कल्पना कोई आज की राजनीति की देन नहीं है. कोविड के दूसरे दौर के फैलने से हुई हजारों मृत्युओं पर जो आंसू बहाए जा रहे हैं यह कोई नए नहीं है, और तो और रामायण में इस का लंबा वर्णन है जब कैकयी राजा दशरथ को याद दिलाती है कि उन्होंने उसे कुछ वायदे कर रखे थे और उन वादों के अनुसार वह राम को नहीं भारत को युवराज पद पर देखना चाहती है.

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