राहुल गांधी ने नरेंद्र मोदी को ‘चौकीदार ही चोर है’ कहना शुरू किया तो नरेंद्र मोदी ने अपनी पार्टी के सभी जनों को और्डर किया कि वे ट्विटर अकाउंट पर अपने नाम के आगे चौकीदार लगा लें, ताकि कौन सा चौकीदार चोर है, पता ही न चले. यह ट्रिक बसों में जेबकतरे अकसर करते हैं. वे जेब काटते हैं और हल्ला मचाने लगते हैं कि उन की जेब कट गई. उन के साथ 4-5 और लोग होते हैं और वे भी यही कहना शुरू कर देते हैं. जिस की असल में जेब कटी, वह बेचारा चुप हो जाता है कि यह तो महामारी है, सब भुगत रहे हैं तो वह भी भुगत लेगा.

वोट राजनीति में धर्म-जाति

नरेंद्र मोदी की चाल काम की रही या नहीं, पर यह समाज की एक गलत इमेज प्रेजैंट करता है. इस आड़ में सब लोग अपनी गलतियों से बच निकलते हैं. टीचर गुरु होते हैं और गुरु ही ब्रह्मा, महेश, विष्णु है, गुरु ही मातापिता है, गुरु ही ईश्वर है, यह कहकह कर निकम्मे, कोचिंग के भूखे, आलसी, अनपढ़ टीचर भी गुरु का खिताब पा कर बच निकलते हैं. रिजर्वेशन की वजह से अब गैरब्राह्मण व गैरसवर्ण भी टीचर बन गए हैं और वे भी गुरु की महिमागान शुरू कर देते हैं ताकि मैं भी चौकीदार में कौन चौकीदार चोर है, पता ही न चले.

क्या यही है अंधा कानून

चौकीदार का खिताब लगाए ट्विटरवासी किस तरह मांबहनों की सैक्सी गालियां देते हैं, यह परखना है तो मोदी की एक गलती को उजागर कर दो. गलती पर तो बात नहीं होगी, पर इन चौकीदारों से गालियां सुनने को मिल जाएंगी. आजकल आम लोग घरदफ्तर की देखभाल करने के लिए जो असली चौकीदार रखते हैं वे भद्दी बातें करते हैं क्योंकि वे कम पढ़ीलिखी फैमिलियों के होते हैं लेकिन ट्विटर वाले चौकीदारों के नाम के आगे शर्मा, भारद्वाज, भार्गव जैसे जातिसूचक शब्द होते हैं, हालांकि उन की पोस्टों में गालियां होती हैं. पता नहीं क्यों ज्यादातर ऊंची, सवर्ण जातियों वाले ही चौकीदार क्यों बने, दलितों में से क्यों नहीं बने.

इन चौकीदारों का हल्ला ट्विटर पर इतना है कि अब सही तर्क की कोई बात करना इंपौसिबल हो गया है. शब्दों के खेल में माहिर ये चौकीदार सबजैक्ट को छोड़ कर तर्क करने वाले की मांबहन पर तुरंत उतर आएंगे. महबूबा मुफ्ती, बरखा दत्त, मायावती ने इन चौकीदारों का अटैक इस सीजन में खूब झेला है. जो कमजोर हैं वे तो ट्विटर ही छोड़ चुके हैं. जो चौकीदार कह कर बच निकले, उन्हें बधाई.

सैक्स संबंधों में उदासीनता क्यों

Tags:
COMMENT