‘4 बोतल वोडका, काम मेरा रोज का...,’ हनी सिंह का यह गीत आज हर युवा की जबान पर है. साथ ही युवाओं की मौजमस्ती का सब से पसंदीदा साधन भी पार्टीज ही होती हैं. जहां मौजमस्ती की खुमारी चढ़ती है. डीजे की धुन पर थिरकते युवकयुवतियां, कम रोशनी में लहराते और एकदूसरे से टकराते जिस्म, हर तरफ धुआं ही धुआं, फिजा में तैरती तीखी और नशीली गंध, सैक्स का कौकटेल, मदहोशी की ऐसी महफिल, जहां हर तरफ  झूमते हुए सैक्सी अंदाज ही दिखेंगे. नशे और नाच के बाद पार्टी का अगला आकर्षण होता है सैक्स. कम उम्र में युवकयुवतियां इस लालच में भी सैक्सी पार्टियों की तरफ आकर्षित होते हैं. नशे में किसे होश रहता है कि वे क्या कर रहे हैं और उन के साथ क्या हो रहा है.

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