जमींदार राकेश कासनिया से फोन पर बात कर के टिल्लू खां बेहद खुश था. वजह यह थी कि जमींदार ने उसे अपने खेतों में काम करने के लिए बुलाया था. दरअसल राजस्थान के हनुमानगढ़ जिले के रहने वाले जमींदार राकेश कासनिया के यहां बड़े स्तर पर कपास की खेती होती है.

कपास की चुगाई के लिए वह भरतपुर जिले के कैथवाड़ा गांव के रहने वाले टिल्लू खां और उस के साथियों को बुला लेता था. जो भी मजदूर उस के यहां आते थे, वे परिवार सहित आते थे. इस बार राकेश कासनिया ने टिल्लू खां से यह भी कह दिया था कि वह अपनी जानपहचान वाले कुछ और लोगों को भी साथ ले आए.

जमींदार के खेतों में परिवार सहित काम करने से जहां उन परिवारों को एकमुश्त मजदूरी मिल जाती थी, वहीं मालिक को भी मजदूरों के लिए दरदर भटकना नहीं पड़ता था. मजदूरों के आनेजाने का किराया भी जमींदार ही देता था. इसलिए मजदूर उस के यहां खुशीखुशी आते थे. भरतपुर हनुमानगढ़ से लगभग 450 किलोमीटर दूर है.

टिल्लू खां ने अपने साथ चलने के लिए करीम खां, अख्तर खां और हबीब से बात की. जमींदार राकेश कासनिया ने सारे मजदूरों के किराए के पैसे टिल्लू खां के खाते में औनलाइन जमा करा दिए थे, जिस से मजदूरों को उस के गांव तक आने में परेशानी न हो.

जमींदार राकेश कासनिया के यहां जाने की बात से सारे मजदूर खुश थे. इस की वजह यह थी कि उन के यहां खानेपीने की कोई परेशानी नहीं होती थी. वहां खाने में घी, दूध और छाछ भी मिलती थी. कुल मिला कर बात यह थी कि जमींदार के खेतों में काम करने वाले मजदूरों की मेहमानों की तरह खातिरतवज्जो होती थी. इसलिए टिल्लू ने जिनजिन लोगों से चलने की बात की, वे सब जाने की तैयारी करने लगे.

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