श्रीनाथ यादव उर्फ नाथे जितना सीधासादा और सज्जन युवक था, उतना ही मेहनती था. जिसकाम में एक बार जुट जाता, उसे खत्म किए बगैर चैन नहीं आता था. लोग उस की तारीफ करते थे कि काम के प्रति लगन हो तो श्रीनाथ जैसी. इस पर श्रीनाथ कहता, किसान जब तक खेत को अपने पसीने से नहीं सींचता, उस की पैदावार में खुशबू नहीं आती.

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