Family Crime: राजस्थान की राजधानी जयपुर में हुए. 2 बच्चों की मां नीरज शर्मा की हत्या ने साबित कर दिया कि जरुरी नहीं रिश्ते सुरक्षित करें. एलएलबी अंतिम वर्ष की छात्रा आयुषि शर्मा ने कानून की पढ़ाई कर चुके ताऊ के बेटे बलराम और रवि के साथ मिल कर एक ऐसी साजिश रची जिस की कोई कल्पना तक नहीं कर सकता. संपत्ति और अनुकंपा नौकरी के लिए आयुषि ने अपनी मां का न सिर्फ मर्डर कराया बल्कि इसे हादसा दिखाने की पूरी कोशिश की, मगर मृतका के भाई राकेश कुमार शर्मा को बहन नीरज की मौत पर शक हुआ तो जांच के बाद पुलिस ने बेटी आयुषि, चचेरे भाई बलराम और ताऊ मोहन स्वरूप शर्मा के साथ सुपारी किलर्स को धर दबोचा.
मूलत: भरतपुर जिले के रहने वाले विजय कुमार वशिष्ठ उर्फ विजय शर्मा राजस्थान हाईकोर्ट, जयपुर में कोर्ट मास्टर पद पर कार्यरत थे. वह वर्षों पहले पत्नी नीरज शर्मा के साथ जयपुर के थाना सांगानेर के अंतर्गत कल्याण नगर-3 स्थित अपने मकान में रहते थे. उन के 2 बच्चे थे, एक 23 साल की बेटी आयुषि और 16 साल का मानसिक रूप से कमजोर बेटा. बेटे की देखभाल मां को करनी होती थी. बेटे के दैनिक कार्य भी मां को करने पड़ते थे. बस, यही कारण था कि आयुषि अपने आप को अकेला समझने लगी थी.
ऐसे में वह ताऊ के परिवार को अपना परिवार मानने लगी. विजय शर्मा के दोनों भाई गांव में रहते थे. विजय शर्मा ने ढाई साल पहले जयपुर की एयरपोर्ट कालोनी स्थित रविंद्र नगर में नया मकान बनवाया और परिवार सहित वहां रहने आ गए. विजय अपने बड़े भाई मोहन स्वरूप के पढ़ाई में कमजोर बेटे बलराम उर्फ रवि को गांव भोमपुरा (भरतपुर) से जयपुर ले आए. उसे खर्चापानी दे कर एलएलबी की पढ़ाई कराई.
आगे की कहानी पढ़ने के लिए सब्सक्राइब करें
डिजिटल
सरिता सब्सक्रिप्शन से जुड़ेें और पाएं
- सरिता मैगजीन का सारा कंटेंट
- देश विदेश के राजनैतिक मुद्दे
- 7000 से ज्यादा कहानियां
- समाजिक समस्याओं पर चोट करते लेख
डिजिटल + 24 प्रिंट मैगजीन
सरिता सब्सक्रिप्शन से जुड़ेें और पाएं
- सरिता मैगजीन का सारा कंटेंट
- देश विदेश के राजनैतिक मुद्दे
- 7000 से ज्यादा कहानियां
- समाजिक समस्याओं पर चोट करते लेख
- 24 प्रिंट मैगजीन





