लेखक-रोहित 

दिसंबर माह से दिल्ली के लोगों ने लगातार दिल्ली में तनाव का माहौल झेला है. पहले चुनाव की सरगर्मी में गर्म होते नेताओं के तेवर व उस से उपजे भारी तनाव. फिर दंगों की आग, अफवाहों के साए और अब कोरोना के कारण एक लंबा लाकडाउन. यह सब इतने कम समय में इतनी तेजी से हुआ कि अगर लोगों का मनोस्तिथि का ब्यौरा लिया जाए तो यह कहना गलत नहीं होगा कि काफी हद तक दिल्लीवासी अवसाद से गुजर रहे हैं. जाहिर है एक सभ्य समाज में उपजे इस तरह के तनाव आने वाली पीढ़ी के लिए मानसिक दुष्प्रभाव का कारण बनेंगे.

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