गांव बसा नहीं लुटेरे पहले आ गए, वाली कहावत कोरोना से पैदा हुये संकट पर एकदम सटीक बैठती है जिसकी कुछ झलकियां देख लेने के बाद ही लगता है कि खामोख्वाह में दुनिया भर के वैज्ञानिक कोरोना से निबटने प्रयोगशालाओं में अपना सर फोड़ रहे हैं. कोई और बात होती या मौका कोई और होता तो इन वैज्ञानिकों को यह सलाह दी जा सकती थी कि वे लैब छोड़कर सीधे अपने निकटतम धर्म स्थल जाएं और वहां दुकान चला रहे पादरी, पंडे या मोमिन से मिलें,  हजार दो हजार रु में कोरोना को नष्ट करने मंत्र, सामग्री या उपाय ले आयें और बंद करें वैक्सीन की खोज दवाई की ईजादी जैसे फिजूल के काम.

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