आज पूरा विश्व एक महामारी की गिरफ्त में हैं , सबकी शिकायत भरी नजर चीन पर उठ रही है, यूँ तो मानव स्वभाव है शिकायत करना. शिकायत तो सभी की होती है एक दूसरे से, पत्नी को शिकायत पति से ;घर पर समय नहीं देते , पति को शिकायत दफ्तर के काम से मुक्ति नहीं मिलती, बच्चों को शिकायत कालेज, कोचिंग के बीच खुद के लिए समय ही नहीं निकाल पा रहे .किसने सोचा था कोरोना जैसा गम्भीर, असाध्य रोग इन शिकायतों का हल बनेगा. जी हाँ ! आज कोरोना से पूरी दुनिया थम गई है.‘जो जहाँ है, जिस हाल में है ...बस वहीं रहे’ घोषणा हर तरफ सुनाई दे रही है . टेलीविजन पर माननीय प्रधानमन्त्री के भाषण के बाद तो मेट को छुट्टी देना हमारा नागरिक कर्तव्य हो गया था, चिंता में थी कैसे होगा ...सफाई , कपड़े, खाना ... उस पर सभी की फुल टाइम घर में मौजूदगी .

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