इस साल के पद्म पुरस्कार भी चीन्ह चीन्ह कर बांटे गए. बंटवारा पूरी तरह भगवा न लगे, इसलिए एनसीपी मुखिया शरद पवार को भी एक बड़ी सी रेवड़ी थमा दी गई जो उन्होंने प्रसाद की तरह ग्रहण भी कर ली. इस पुरस्कार की जितनी खुशी शरद पवार को हुई होगी उस से ज्यादा कसमसाहट ठाकरे ब्रदर्स को हुई. एकदो नहीं, बल्कि दर्जनों वजहें ऐसी हैं जिन के चलते मुद्दत से उद्धव और राज ठाकरे दोनों भाजपा से खफा चल रहे हैं. इन में से सब से अहम है शिवसेना मुखिया बाल ठाकरे को कुछ न देना. सो, विरोधस्वरूप उन्होंने गठबंधन तोड़ लिया. इस टूटन का दायरा अभी प्रायोगात्मक तौर पर मुंबई तक ही सिमटा रहेगा जिस में निष्कर्ष ये समझ आएंगे कि भाजपा व शिवसेना अगर अलगअलग लड़ें तो राज ठाकरे की मनसे सहित कांग्रेस व एनसीपी की स्थिति क्या रहेगी और भविष्य में शरद पवार अगर भाजपा से हाथ मिलाते हैं तो क्या ठाकरे बंधु एक हो कर महाराष्ट्र में हाथ रख पाएंगे?  

 

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