कलकत्ता हाईकोर्ट के चर्चित पूर्व जस्टिस सीएस कर्णन का गुनाह किसी को समझ नहीं आ रहा कि वह आखिर था क्या? लेकिन गिरफ्तारी के बाद जब उन्हें अलीपुर स्थित जेल, जिसे प्रैसिडैंसी करैक्शन होम भी कहा जाता है, में ले जाया गया तो उन के दिल का गुबार आंखों के रास्ते बह निकला, जिसे बोलचाल की भाषा में रोना कहा जाता है.

जिस शख्स ने इंसाफ के लिए लाखों को जेल का रास्ता दिखाया हो उसे जेल जाना पड़े, इस से ज्यादा जलालत की बात कोई और हो भी नहीं सकती. उम्मीद है इस कांड के बाद कोई जज अपने साथियों पर भ्रष्ट्राचारी होने का आरोप नहीं लगाएगा और न ही खुद के दलित होने की दुहाई देगा. सर्वोच्च न्यायालय ने न्यायालय की प्रतिष्ठा रखी है या अन्याय के विरुद्ध आवाज को कुचला है, अभी नहीं कहा जा सकता. हां, दलितों को यह विश्वास होता जा रहा है कि उन का इस देश में अभी दिखावे भर का वजूद है.

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