आस्ट्रेलिया बना वर्ल्ड चैंपियन

आस्ट्रेलियाई क्रिकेट टीम ने 5वीं बार क्रिकेट वर्ल्ड कप का खिताब जीता और कप्तान माइकल क्लार्क को शानदार विजयी विदाई भी दी. मिचेल स्टार्क को प्लेयर औफ द सीरीज और जेम्स फाल्कनर को प्लेयर औफ द मैच चुना गया. इस जीत के साथ ही आस्ट्रेलिया को 3,975,000 यूएस डौलर यानी 24.64 करोड़ रुपए इनाम के तौर पर मिले. विश्व कप में नौक आउट तक सभी मैच जीतने वाली कीवी टीम का कोई भी बल्लेबाज कंगारू गेंदबाजी के आगे चल नहीं सका. कीवी बल्लेबाज आक्रामक बल्लेबाजी के चक्कर में एक के बाद एक पवेलियन लौटते गए और 183 रनों में पूरी टीम सिमट गई जबकि आस्ट्रेलिया ने 184 रनों का लक्ष्य 33.1 ओवरों में 3 विकेट खो कर हासिल कर लिया.

मेलबर्न क्रिकेट मैदान पर हुए फाइनल मुकाबले का मजा लेने के लिए तकरीबन 91 हजार दर्शक मौजूद थे लेकिन वे थोड़े निराश जरूर हुए क्योंकि मैच शुरू से ही एकतरफा रहा. चौकेछक्के अधिक नहीं लगे. कंगारू टीम के खिलाडि़यों को भी न तो पसीना बहाना पड़ा और न ही किसी भी खेलप्रेमी के दिल की धड़कनें तेज हुईं. न्यूजीलैंड ने टौस जीत कर पहले बल्लेबाजी करने का फैसला किया लेकिन कंगारू टीम शुरू से हावी रही और घातक गेंदबाजी व क्षेत्ररक्षण में आस्ट्रेलियाई खिलाडि़यों ने कोई गलती नहीं की. आस्ट्रेलियाई टीम की यह शुरू से ही खासीयत रही है कि वह मजबूत रणनीति के साथ मैदान में उतरती है. उस की बल्लेबाजी काफी मजबूत है तथा 9वें और 10वें क्रम तक के खिलाड़ी भी बल्लेबाजी की क्षमता रखते हैं. साथ ही गेंदबाजी भी घातक है. कुल मिला कर आस्ट्रेलियाई टीम वाकई जीत की हकदार थी.

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बिना लड़े ही हार गए

टीम इंडिया का विश्व कप से बाहर होना भारतीय क्रिकेट प्रेमियों को सदमा दे गया. सेमीफाइनल मुकाबले में आस्ट्रेलियाई खिलाडि़यों ने खेल जज्बे को दिखाते हुए धौनी के धुरंधरों को धूल चटा दी. इस के साथ ही टीम इंडिया ने लगातार 7 मैच जीत कर जो भरोसा हासिल किया था वह भी खो दिया. जबकि टीम इंडिया ने इस से पहले पाकिस्तान, दक्षिण अफ्रीका, वेस्टइंडीज, आयरलैंड, जिम्बाब्वे समेत संयुक्त अरब अमीरात को पटकनी दी लेकिन सेमीफाइनल में टीम इंडिया के जिन खिलाडि़यों पर सब से ज्यादा भरोसा था उन्हीं खिलाडि़यों ने उस भरोसे को तोड़ दिया. शिखर धवन, रोहित शर्मा, विराट कोहली और सुरेश रैना जैसे बल्लेबाज गैरजिम्मेदाराना शौर्ट खेल कर चलते बने. वहीं रवींद्र जडेजा को औलराउंडर के तौर पर लिया गया था लेकिन जडेजा किस बात के औलराउंडर क्रिकेट पंडितों को लगे ये तो वही जानें. इस विश्व कप में जडेजा के बल्ले से न तो रन बना और न ही गेंदबाजी में कोई कारनामा दिखा.

जहां तक गेंदबाजों की बात है तो टीम इंडिया के लिए यह समस्या हमेशा से रही है लेकिन इस विश्वकप में गेंदबाजों से थोड़ीबहुत उम्मीद जरूर जगी थी लेकिन सिडनी के मैदान में जिस तरह गेंदबाजों ने शौर्ट गेंद डाल कर बाउंस कराना चाहा, वह प्रयास भी असफल रहा क्योंकि उन की गेंद में स्पीड थी ही नहीं इसलिए कंगारुओं ने इस का जम कर फायदा उठाया. हारजीत तो खेल का हिस्सा है. किसी एक टीम की हार तो होनी ही है लेकिन कंगारुओं ने क्या 329 रन का टारगेट दिया कि टीम इंडिया ने पहले ही घुटने टेक दिए. टीम इंडिया को विश्वचैंपियन की तरह खेलना चाहिए था पर ऐसा हो न सका.

बहरहाल, यही कहा जा सकता है कि सिडनी के मैदान में टीम इंडिया के योद्धा बिना लड़े ही मैच हार गए क्योंकि मैदान पर उस दिन न तो जज्बा दिखा और न ही जनून. टीम इंडिया को आस्ट्रेलियन खिलाडि़यों से सबक लेना चाहिए. आज अगर आस्ट्रेलिया चैंपियन है तो मैदान में खिलाडि़यों का जज्बा और जनून दोनों दिखता है.

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वर्ल्ड की नंबर वन साइना

विश्व की नंबर वन बैडमिंटन खिलाड़ी का ताज अपने सिर सजाने के एक दिन बाद साइना नेहवाल ने इंडियन ओपन सुपर सीरीज बैडमिंटन चैंपियनशिप के फाइनल में थाईलैंड की रातनचोक इंतानोन को पराजित कर खिताब अपने नाम कर लिया. फाइनल जीतने के बाद साइना ने कहा कि वे पिछले 4 वर्षों से इस के लिए मेहनत कर रही थीं. उन्होंने आगे कहा कि उन के सिर पर बहुत बड़ा बोझ था जो अब उतर गया. साइना एक जुझारू खिलाड़ी हैं. वे संघर्ष करने में विश्वास करती हैं और हारने के बाद ऐसा नहीं है कि वे जीतने की कोशिश छोड़ देती हैं. इस के लिए वे दिनरात कड़ी मेहनत करती हैं. और लगन से मेहनत करने पर एक न एक दिन कामयाबी मिल ही जाती है. शायद, इसी का नतीजा है कि साइना आज विश्व की नंबर वन बैडमिंटन खिलाड़ी हैं.

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