भोपाल के चर्चित एनकाउंटर में सिमी के 8 कैदी मारे गए तो उम्मीद के मुताबिक कांग्रेसी नेता दिग्विजय सिंह ने तुरंत एतराज यह कहते जता दिया कि कहीं यह घटना पूर्वनियोजित तो नहीं थी. इस की जांच होनी चाहिए. योजना यानी साजिश जिसे खुलेतौर पर दिग्विजय सिंह नहीं कह पाए पर इस बयान पर सोशल मीडिया में खासा हल्ला मच गया. व्हाट्सऐप ग्रुपों की तो यह हालत रही कि कई धर्मनिरपेक्ष एडमिनों को शांतिशांति कहते बहस में दखल देना पड़ा, क्योंकि मुद्दा सिमी के कैदी न रह कर हिंदूमुसलिम हो गए थे. हिंदुओं ने इसे मुसलमानों को सबक सिखाने वाला कदम बताया तो व्हाट्सऐप पर भी अल्पसंख्यक रहे मुसलमानों ने फरियाद की कि हर मुसलमान को आतंकी न समझा और कहा जाए. अब भला कैसे और किस मुंह से धर्मनिरपेक्षता की बात देश में की जाए समझ से परे है लेकिन एक सटीक बयान दिग्विजय को महंगा पड़ गया और कुछ व्हाट्सऐप प्रेमियों ने तो उन के नाम के ही आगे ‘खान’ जोड़ दिया.

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