सरकार ने कॉल ड्राप को लेकर एक बार फिर टेलीकॉम आपरेटरों को चेताया है. संचार मंत्री ने साफ-साफ कहा सरकार कॉल ड्रॉप के हर पहलू को देख रही है और इसमें किसी भी प्रकार की ट्रिक नहीं चलेगी.

हाल ही में डिपार्टमेंट ऑफ टेलीकॉम (डॉट) की आई एक रिपोर्ट में बताया गया है कि पिछले तीन माह में कॉल ड्रॉप में करीब 7 फीसदी की गिरावट आई है.

रेडियो लिंक टॉइम आऊट तकनीक पर है नजर

टेलीकॉम कंपनियों की तरफ रेडियो लिंक टाइम आऊट तकनीक से कॉल ड्रॉप की समस्‍या को छिपाने के बारे में कहा कि डॉट के अलावा ट्राई भी इस पर हर तिमाही में रिपोर्ट जारी करता है. उन्‍होंने कहा कि पिछले करीब 8 माह में रिकॉर्ड टॉवर लगाए गए हैं. इससे भी समस्‍या कम हो सकती है, लेकिन फिर भी इस पर लगातार नजर रहती है. रेडियो लिंक टाइम आऊट तकनीक की मदद कॉल ड्रॉप होने पर भी यह तकनीकी रूप से कॉल ड्रॉप दर्ज नहीं होती है.

1 लाख से ज्‍यादा मोबाइल टॉवर और लगाए गए

टेलीकॉम ऑपरेटरों ने सरकार को जानकारी दी है कि उनकी तरफ से जून 2015 से दिसम्‍बर 2016 तक 1.6 लाख टॉवर लगाए गए हैं. वहीं ट्राई ने कहा है कि सभी टेलीकॉम आपरेटरों को जून से सितम्‍बर की तिमाही तक कॉल ड्रॉप को लेकर बनाए गए मानक पूरे करने होंगे. ट्राई के अनुसार अक्‍टूबर से दिसम्‍बर 2016 के दौरान एयरसेल का प्रदर्शन ज्‍यादातर सर्किलों में कॉल ड्रॉप के मामले में मानक से कम था.

डॉट ने शुरू की है आईवीआरएस व्‍यवस्‍था

डॉट ने आईवीआरएस व्‍यवस्‍था शुरू की है. इसके तहत ग्राहकों को कॉल कर कॉल ड्रॉप का स्‍टेटस जाना जाता है. सिन्‍हा ने बताया कि इससे सरकार को पता चल रहा है कि कहां पर सेवा का स्‍तर अच्‍छा नहीं है. इस व्‍यवस्‍था के तहत करीब 2600 कॉल रोज की जाती हैं. इससे जिस जगह पर कॉल ड्रॉप की समस्‍या की जगह का पता चलता है तो उसी समय संबंधित मोबाइल ऑपरेटरों को सू‍चित किया जाता है.

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