Iran Israel War: इंसान के दिमाग पर जंग का असर जंग चलने तक ही नहीं बल्कि जंग खत्म होने के बाद कई सालों तक और उस के बाद उस की आने वाली पीढि़यों के मन, व्यवहार और व्यक्तित्व तक में उतर जाता है. युद्ध की सब से भयावह सच्चाई यह है कि यह सिर्फ सीमाओं पर नहीं लड़ा जाता बल्कि इंसानी दिमाग के भीतर भी चलता रहता है, कभी खत्म न होने वाली लड़ाई की तरह.

ईरान और इजराइल के बीच चल रहे युद्ध के हालात ने पूरी दुनिया की इकोनौमी और पौलिटिक्स को हिला कर रख दिया है. इस संघर्ष ने ऊर्जा, बाजार और कूटनीतिक समीकरणों का तानाबाना तो उधाड़ ही दिया है, इस का सब से गहरा और दीर्घकालिक असर उन आम लोगों पर पड़ रहा है जो जंग की धधकती आग के बीच रहने को मजबूर हैं.

ईरान-इजराइल युद्ध प्रभावित क्षेत्रों में रह रहे लोगों की मानसिक व भावनात्मक स्थिति पर कोई बात करता दिखाई नहीं दे रहा. साइकोलौजिस्ट एंड ह्यूमन एंड सोशल राइट्स एक्टिविस्ट मालिनी सबा की मानें तो युद्ध से जन्मी स्थितियां मानव मन पर इतनी गहरी छाप छोड़ती हैं कि इस का असर पीढि़यों तक नजर आता है. भले ही ईरान-इजराइल युद्ध सीजफायर के कारण अभी रूका हुआ है. और कुछ दिनों बाद खत्म भी हो सकता है, लेकिन कड़वा सच यह है कि इस से जन्मी मानसिक और भावनात्मक समस्याएं एक से दूसरी पीढ़ी को विरासत में मिलती रहेंगी.

वर्ल्ड हैल्थ और्गेनाइजेशन का भी कहना है कि युद्ध और सशस्त्र संघर्ष से प्रभावित क्षेत्रों में रहने वाले लगभग हर

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