Shakti Samanta Birth Centenary: शक्ति सामंत के जन्म शताब्दी वर्ष पर खास मनोरंजन के साथ भारतीय समाज की रीढ़ और धर्म के ठेकेदारों पर प्रहार करने वाली फिल्मों का सर्जक फिल्मकार शक्ति सामंत

फिल्मकार शक्ति सामंत केवल ‘चौकलेट हीरो’ राजेश खन्ना के सहारे रोमांटिक फिल्में नहीं बना रहे थे बल्कि वे मनोरंजन के माध्यम से भारतीय समाज की रीढ़ पर प्रहार कर रहे थे. शक्ति सामंत ने धर्म को ईश्वर की पूजा के रूप में नहीं, बल्कि मानवता के तराजू पर तोला. उन्होंने अपनी फिल्मों में स्पष्ट रूप से रेखांकित किया कि अकसर जो समाज खुद को सब से धार्मिक या संस्कारी कहता है, वही सब से ज्यादा अमानवीय और क्रूर होता है.

भारतीय सिनेमा के इतिहास में शक्ति सामंत (जन्मः 13 जनवरी, 1926, मृत्यु: 9 अप्रैल, 2009) का नाम केवल व्यावसायिक सफलता की गारंटी देने वाले निर्देशक के रूप में नहीं, बल्कि एक ऐसे ‘विजनरी’ निर्देशक’ के रूप में दर्ज है, जिन्होंने मनोरंजन के चकाचौंधभरे फ्रेम में गहरे सामाजिक सरोकारों को छिपाने की कला विकसित की थी. उन के जन्म शताब्दी वर्ष यानी कि 2026 में लोग अपनेअपने तरीके से उन्हें याद कर रहे हैं, श्रृद्धांजलि दे रहे हैं. जबकि हमें लगता है कि ऐसे वक्त में शक्ति सामंत के सिनेमा का पुनर्मूल्यांकन किया जाना चाहिए.

जरूरत इस बात को परखने की है कि 60 व 70 के दशक में शक्ति सामंत का बनाया हुआ सिनेमा आज ज्यादा प्रासंगिक क्यों हैं? क्योंकि शक्ति सामंत ने अपने समय से आगे का सिनेमा बनाते हुए अपनी फिल्मों के माध्यम से सामाजिक सरोकारों, नारी चेतना, बहिष्कृत महिलाओं- विधवा या वेश्या- को मुख्य धारा में लाने के साथ ही धार्मिक पाखंडों पर जम कर कुठाराघाट किया. वहीं, लालच और भ्रष्टाचार को भी रेखांकित करने में उन्होंने कोई कसर बाकी नहीं रखी.

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