Emotional Story: आज ठंड कुछ ज्यादा थी. उन्होंने मोबाइल उठा कर देखा तो दिल्ली का टैंपरेचर 4 डिग्री दिखा रहा था, यह देखते ही दिल बैठ गया था. उन्होंने अपने बगल में राखी शौल को सिर में लपेट कर रजाई को दोनों तरफ दबा लिया. वे सोचने लगीं कि यह शरीर की ठंड नहीं है बल्कि यह तो उन के अंतर्मन की निराशा, अपनों से मिली निष्ठुरता और एकाकीपन का दर्द है जिस ने ठंड के रूप में उन्हें जकड़ लिया है.

सलोनी के सामने वह दृश्य बारबार आ जाता था. बहुतकुछ हो जाने के बाद आखिर उन के बेटे सजल और दिव्या के बीच तलाक हो ही गया था. तलाक के 3 शब्दों पर दस्तखत होने और उस के बाइज्जत बरी होने में पूरे 10 साल का लंबा समय लगा था.

फैसला सुनने के बाद सजल अपनी मां सलोनी का हाथ पकड़ कर कोर्ट से बाहर एक तरफ गया तो उस की अब तलाकशुदा बहू दिव्या अपने पापा के साथ दूसरी तरफ. उन्होंने सोचा था कि अब 10 साल बाद उन्हें जेल से मुक्ति मिल गई है. वे क्या जानती थीं कि आगे क्या होने वाला है.

कोर्ट के गेट से वे बाहर निकल रही थीं, तभी दिव्या अपने पापा के साथ बाहर की तरफ निकल रही थी. वह एक पल को ठिठकी थी और फिर उन के सामने आ कर खड़ी हो गई, ‘आई एम सौरी, मम्मा.’

‘सौरी सजल.’

इन 10 वर्षों में उन्होंने जिस नर्क को झेला है, वही जानती हैं. उन के जीवन की दिशा बदल गई थी. एक हंसतेखेलते परिवार की खुशियां छीन कर ‘आई एम सौरी’ कह कर कितनी आसानी से अपना पल्ला झाड़ रही है. वे उस के भोले चेहरे की पीछे छिपे चालबाज दिमाग को जलती निगाहों से घूर रही थीं. वे कुछ कटु शब्दों में अपने दिल की आग उगलना चाह रहीं थीं कि तभी सजल बोला, ‘आई एम सौरी, दिव्या.’

आगे की कहानी पढ़ने के लिए सब्सक्राइब करें

डिजिटल

(1 साल)
USD99USD49
 
सब्सक्राइब करें

सरिता सब्सक्रिप्शन से जुड़ेें और पाएं

  • सरिता मैगजीन का सारा कंटेंट
  • देश विदेश के राजनैतिक मुद्दे
  • 7000 से ज्यादा कहानियां
  • समाजिक समस्याओं पर चोट करते लेख
 

डिजिटल + 24 प्रिंट मैगजीन

(1 साल)
USD150USD129
 
सब्सक्राइब करें

सरिता सब्सक्रिप्शन से जुड़ेें और पाएं

  • सरिता मैगजीन का सारा कंटेंट
  • देश विदेश के राजनैतिक मुद्दे
  • 7000 से ज्यादा कहानियां
  • समाजिक समस्याओं पर चोट करते लेख
  • 24 प्रिंट मैगजीन
और कहानियां पढ़ने के लिए क्लिक करें...