भारत और पाकिस्तान में एक ही फिल्मी जबान बोली जाती है और दर्शक भी दोनों तरफ का सिनेमा पसंद करते हैं. लेकिन आपसी संबंधों की कडवाहट के चलते कई भारतीय फिल्में वहां बैन हो जाती हैं जबकि मुंबई से कुछ पाकिस्तानी कलाकारों को कड़वे अनुभव से गुजरना पड़ा. बावजूद इसके दोनों देशों एक फिल्म मेकर्स आपसी संबंधों को सुधारने के क्रम अपनी तरफ से छोटी मोटी पहल करते रहते हैं.

इसी पहल का नतीजा है कि पाकिस्तान फिल्म फेस्टिवल में कई भारतीय फिल्मी हस्तियां बतौर चीफ गेस्ट शामिल हो रही हैं. बता दें कि पाकिस्तान का सबसे बड़ा फिल्म त्योहार, एआरवाई फिल्म फेस्टिवल अगले साल 25 से 28 जनवरी तक कराची में आयोजित किया जाएगा.

बौलीवुड के पुरस्कार विजेता फिल्म निर्माताओं राहुल मित्रा और तिग्मांशु धुलिया के साथ लोकप्रिय अभिनेता संजय मिश्रा को इस फिल्मोत्सव में ‘गेस्ट ऑफ औनर’ दिया जाएगा. पाकिस्तान के सबसे बड़ा सेटेलाइट टीवी नेटवर्क एआरवाई डिजिटल नेटवर्क, जिसे 100 देशों में देखा जाता है, ही एआरवाई फिल्म फेस्टिवल का आयोजन कर रहा है.

इस महोत्सव का उद्देश्य युवाओं और फिल्म निर्माण के प्रति उत्साही लोगों को साथ एक साथ लाने और कला के रूप में उन्हें अपना जुनून दिखाने के लिए एक महत्वपूर्ण मंच प्रदान करना है. यह एक एक मंच होगा, जहां फिल्म और मीडिया उद्योग के प्रसिद्ध हस्तियों के साथ प्रतिभागी अपना ज्ञान और अनुभव साझा कर पाएंगे, जिससे पाकिस्तानी सिनेमा और स्थानीय फिल्म निर्माताओं को प्रोत्साहन मिलेगा.

इस मौके पर बौलीवुड के सेलिब्रिटीज के कई मंचों पर अपनी बातरखने और अपने पाकिस्तानी समकक्षों से बातचीत करने की उम्मीद है. बौलीवुड की इस तिकड़ी के साथ दिल्ली दिल्ली अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव के राम किशोर पारचा भी होंगे.

उल्लेखनीय है कि फिलहाल तिग्मांशु धुलिया बतौर एक्टर अपनी अगली रिलीज होने वाली फिल्म ‘जीरो’ को लेकर भी चर्चा में, जिसमें उन्होंने शाहरुख खान के पिता की भूमिका निभाई है, जबकि मार्च में उनके निर्देशन से सजी फिल्म ‘मिलन टौकीज’ भी रिलीज होने के लिए तैयार है.

वहीं, निर्माता राहुल मित्रा फिलहाल संजय दत्त, नरगिस फाखरी, राहुल देव अभिनीत अपनी अगली बड़ी फिल्म ‘टोरबाज’ को खत्म करने में जुटे हैं, जिसमें मित्रा भी एक अफगान सेना जनरल की महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं.

बहरहाल पाकिस्तान में इस तरह के फेस्टिवल का आयोजन वहां के कलाकारों के लिए भी प्रोत्साहन का मंच होगा क्योंकि वहां भी सिनेमा को कट्टरपंथी सोच से लड़ना पड़ता है और इस तरह के फेस्टिवल मंच मंच के जरिये काफी फिल्म मेकर्स को हौसला मिलता है. दुनिया भर के कला के लोग जमा होते हैं और सकरी मुलाजिम भी. अब ऐसे में उम्मीद तो यही करनी चाहिए कि भारत में इस तरह के फेस्टिवल में पाक कलाकारों को बायकौट करने के बजाए उनका स्वागत किया जाए.

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