जब से बायोपिक फिल्में बनना शुरू हुई हैं, तब से एक सवाल उठने लगा है कि क्या बायोपिक फिल्मो के वास्तविक किरदार को निभाना कलाकार आसान नहीं होता है. तमाम कलाकार इसे आसान मानते हैं. जबकि फिल्म ‘अजहर’ में संगीता बिजलानी का किरदार निभा चुकी अदाकारा नरगिस फाखरी कहती हैं- ‘‘काल्पनिक किरदार निभाना ज्यादा आसान होता है. ऐसे किरदारों की तुलना किसी से नहीं की जाती. काल्पनिक किरदार निभाते समय कलाकार के तौर पर हम अपनी तरफ से उसमें कुछ नया जोड़ सकते हैं.

हम लेखक व निर्देशक की मदद से उस किरदार को अमली जामा पहनाते है. हम किरदार को रचते हैं. किरदार का एटीट्यूड क्या होगा, वह किरदार कहां से आया है, उसकी पृष्ठभूमि क्या है, उसकी सोच किस तरह की है, इन सारी बातों पर गौर कर हम खुद ही एक नया किरदार रचते हैं. पर जब रीयल लाइफ का वास्तविक किरदार हो, तो हम पर काफी जिम्मेदारियां होती हैं. ऐसे किरदार से लोग परिचित होते हैं, तो उससे तुलना भी होती है.’’

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