बॉलीवुड में नाना पाटेकर उन कलाकारों में से एक हैं, जो कि हर मसले पर खुलकर बात करते हैं. वे राजनेताओं की आलोचना करने से भी नहीं कतराते हैं. वे पिछले कुछ वर्षों से महाराष्ट्र के सूखाग्रस्त इलाकों के किसानों के लिए काफी काम कर रहे हैं. वे खुद ही किसान परिवारों से मिलकर किसानों की विधवाओं के हाथ में धन दे रहे हैं. हाल फिलहाल वे महाराष्ट्र में काफी यात्राएं कर रहे हैं, तो कहीं उनका ईरादा राजनीति से जुड़ने का तो नही हैं.

इस बात पर नाना पाटेकर मुखर होकर कहते हैं कि ‘‘देखिए, मुझे सच बोलने की आदत है, इसलिए हर राजनीतिक पार्टी मुझे दो दिन में अपनी पार्टी से बाहर कर देगी. मैं दूसरी पार्टी में जाउंगा. दो दिन बाद वहां भी यही होगा और एक माह के बाद ऐसी कोई पार्टी नहीं बचेगी, जिसमें मैं जा सकूंगा. सबसे बड़ा सच ये है कि जिस दिन आप किसी राजनीतिक पार्टी के सदस्य बन जाते हैं, उसी दिन आप सच बोलने का हक भी खो देते हैं. यदि आप देखते हैं कि आपकी पार्टी का ही सदस्य कुछ गलत कर रहा हैं, तब भी आपको चुप रहना पडे़गा. आप वास्तव में जो कुछ करना चाहते हैं वह राजनीति व राजनीतिक पार्टी से जुड़कर नहीं कर सकते. मेरे जैसे इंसान के लिए राजनीति से दूरी ही भली है. यह हमारी गलती है कि हम वोट देने के बाद यह सोच लेते हैं कि अब सरकार 5 साल के लिए बन गयी और हम कुछ नहीं कर सकते, जबकि हमने वोट दिया है, तो उनकी जिम्मेदारी होती है कि हम नागरिकों के लिए काम करें.’’

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