Brazil Election: ब्राजील के राष्ट्रपति के चुनाव में मौजूदा वामपंथी राष्ट्रपति लुइज इनासियो लूला दा सिल्वा ने कड़े मुकाबले में घनघोर दक्षिणपंथी सीनेटर फ्लावियो बोल्सोनारो को हरा कर चौथी बार सत्ता संभाली है.
लूला को 52 फीसदी जबकि बोल्सोनारो को 48 फीसदी वोट मिले. यह नतीजा इस लिहाज से हैरान कर देने वाला है कि भले ही बोल्सोनारो चुनाव हार गए हों लेकिन ब्राजील की संसद में दक्षिणपंथी बेहद मजबूत स्थिति में हैं.
अब दिलचस्प स्थिति लगभग भारत जैसी यह है कि दर्जनभर से ज्यादा दलों में बाकी सीटें बंट गई हैं. गौरतलब है कि ब्राजील की संसद के निचले सदन चैंबर औफ डिप्टीज में कुल 513 सीटें हैं. उस में बोल्सोनारो की लिबरल पार्टी की सीटें 97 से बढ़ कर 121 हो गई हैं जबकि लूला की वर्कर्स पार्टी, जिसे श्रमिक दल भी कहा जाता है, को महज 70 सीटें मिली हैं.
इस में सहयोगी दलों की सीटें जोड़ दें तो भी वाम गठबंधन आंकड़ा 109 पर आ कर ठहर जाता है. उलट इस के, दक्षिणपंथी गुट के हिस्से में कुल 259 सीटें हैं जो बहुमत से 2 ज्यादा हैं. उच्च सदन यानी फैडरल सीनेट की 81 सीटों में से 48 दक्षिणपंथी गुट के पास हैं जबकि वामपंथी गुट के हिस्से में महज 15 सीटें हैं. बाकी 18 दूसरे दलों के कब्जे में हैं.
इन आंकड़ों और ब्राजील के हालात के मद्देनजर जाहिर है लुइज इनासियो लूला दा सिल्वा को विभाजित संसद मिली है जिस में बहुमत दक्षिणपंथी दलों का है. यह बिलकुल अमेरिका जैसी स्थिति है कि 4 नवंबर को मध्यावधि चुनाव में डोनाल्ड ट्रंप की रिपब्लिकन पार्टी दोनों सदन हार गई और संसद पर नियंत्रण डैमोक्रेट्स का हो गया. ऐसे में लूला को कोई भी कानून या अपने मुताबिक बजट पास कराना आसान नहीं होगा.
आगे की कहानी पढ़ने के लिए सब्सक्राइब करें
डिजिटल
- सरिता मैगजीन का सारा कंटेंट
- देश विदेश के राजनैतिक मुद्दे
- 7000 से ज्यादा कहानियां
- समाजिक समस्याओं पर चोट करते लेख
24 प्रिंट मैगजीन + फ्री डिजिटल
- 24 प्रिंट मैगजीन + डिजिटल एक्सेस + ऐप
- सरिता मैगजीन का सारा कंटेंट
- देश विदेश के राजनैतिक मुद्दे
- 7000 से ज्यादा कहानियां
- समाजिक समस्याओं पर चोट करते लेख




