Israel Election: ये पंक्तियां जब तक पाठकों तक पहुंचेंगी तब तक बहुत मुमकिन है कि इजराइल में सरकार का गठन हो चुका हो. राष्ट्रपति इसाक हर्जोग जिसे भी आमंत्रित करेंगे उसे 28 दिन के अंदर संसद में अपना बहुमत साबित करना पड़ेगा और अगर मौजूदा संकट नहीं सुलझता है तो इजराइल को 2027 में एक और चुनाव के लिए तैयार रहना होगा.
संकट यह है कि 27 अक्तूबर को हुए चुनाव में वोटर ने किसी भी दल या गठबंधन को स्पष्ट बहुमत नहीं दिया है. दक्षिणपंथी गुट, जिस के नेता बेंजामिन नेतन्याहू हैं, को सब से ज्यादा 53 सीटें 120 सदस्यों वाली संसद (जिसे नेसेट कहा जाता है) में मिली हैं. जबकि वामपंथियों और मध्यमार्गियों के जायोनी गुट के खाते में 48 सीटें आई हैं.
सभी को चौंकाते हुए अरब पार्टियां, जिन का कोई घोषित गुट या गठबंधन नहीं है, 19 सीटें ले गई हैं. इस तरह सरकार बनाने के लिए स्पष्ट बहुमत वाली 61 सीटें किसी के पास नहीं हैं. जाहिर है, अरब पार्टियां जिस तरफ झुक जाएंगी, प्रधानमंत्री उसी गुट का होगा.
अगर उन्होंने दक्षिणपंथी गुट को समर्थन दिया जिस की कि संभावना कम है तो नेतन्याहू फिर से इस पद पर दिखेंगे और अगर वामपंथियों से हाथ मिलाया जिस की कि संभावनाएं ज्यादा हैं तो प्रधानमंत्री गादी आइजेनकोट हो सकते हैं जो इजराइल के पूर्व सैन्य प्रमुख हैं.
हालांकि मौका याइर गोलन को भी मिल सकता है जिन्हें कट्टर वामपंथी माना जाता है. उन्हें इजराइल में बिखरते वामपंथ को एकजुट होने का श्रेय भी जाता है.
संभावना इसी बात की ज्यादा है कि राष्ट्रपति इसाक हर्जोग वामपंथियों को सरकार बनाने के लिए न्योता दे सकते हैं क्योंकि अरब पार्टियों का मिजाज दक्षिणपंथियों से मेल नहीं खाता. उन की कुंडली के गुण वामपंथियों से ज्यादा मिलते हैं.
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