अम्बिकार /भारतीय सिनेमा के क्षेत्र में एक सशक्त निर्माता और अभिनेता के रूप में उभर रहे आनन्द कुमार अब किसी परिचय के मोहताज नही हैं . पिछले 22 वर्षों से नुक्कड़ नाटक के माध्यम से करोंड़ो लोगों को अपना संदेश दे चुके आनन्द इन दिनों अपनी नई फिल्म ''आइ एम नाट ब्लाईडं'' ओनली माई आईज कान्ट सी को लेकर देश विदेश में चर्चा में है.

एक अंधे व्यक्ति के आई.ए.एस. बनने की सफलता की कहानी पर आधारित यह फिल्म दिव्यांगजनों को हौसला प्रदान करेगा. यह फिल्म माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेद्र मोदी जी के सपनों को साकार करने वाली फिल्म है.

मदारी आर्ट्स द्वारा बनाई गई फिल्म लंगड़ा राजकुमार को राष्ट्रीय, अर्न्तराष्ट्रीय स्तर पर पुरस्कार मिल चुका है. इसी तरह डाक्यूमेन्ट्री फिल्म ''स्वयं बीइगं माई सेल्फ'' साक्षर भारत एक नई रौशनी, लघु फिल्म, हेल्प टु अदर, डोंट से अगेन, डोंट से लंगड़ा, पागल, हैण्डपम्प को राष्ट्रीय स्तर पर एन.एफ.डी.सी. द्वारा पुरूस्कृत किया गया है.

पिछले 20 वर्षों से ज्यादा समय से नुक्कड नाटक और फिल्मों से जुडे़ ''नुक्कड के महानायक'' के नाम से मशहूर आनन्द कुमार सशक्त सिनेमा की नई पहचान के रूप में उभर रहे हैं. फिल्म लंगड़ा राजकुमार में गरीब मजदूर और आइ एम नाट ब्लाइंड में ब्लांइड व्यक्ति की भूमिका से आनन्द के सशक्त अभिनेता होने का गुण देखा जा सकता है. इनके अभिनय में मेहनत और संघर्ष साफ झलकता है.

इस संबंध में आनन्द ने बताया की आज सार्थक और इंस्पायरिंग सिनेमा का दौर है, फिल्म समाज का आईना होता है. मैं संदेशपरक फिल्में करना चाहता हूं, फिल्मों के माध्यम से सरगुजा छत्तीसगढ की कला संस्कृति को अर्न्तराष्ट्रीय पटल पर स्थापित करना चाहता हूं .

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