भ्रष्ट राजनेता की करतूतों के साथ प्रेम कहानी को पेश करने वाली फिल्म ‘‘बाबा ब्लैकशिप’’ कहीं से भी दर्शकों को अपनी तरफ नहीं खींचती है.

फिल्म ‘‘बाबा ब्लैकशिप’’ की कहानी गोवा में रहने वाले बाबा (मनीष पौल) से शुरू होती है. जो कि एक आर्ट शिक्षक से आर्ट डीलर बने ब्रायन मोरिस उर्फ सांता (अन्नु कपूर) की बेटी एंजिला मोरिस (मंजरी फड़नवीस) से प्यार करता है. दोनों शादी करना चाहते हैं, मगर सांता ऐसा नहींहोने देना चाहते. उनकी नजर में एक काजू बेचने वाले की कमाई कुछ नहीं हो सकती. बाबा इस बात से अनजान है कि एंजिला के पिता मशहूर पेटिंग चुराकर, उनकी नकल वाली पेटिंग बनाकर मौलिक पेटिंग के रूप में बेचकर लोगों को ठगते रहते हैं.

उधर बाबा अब तक अपने पिता चारूदत्त शर्मा (अनुपम खेर) को अपनी मां की डांट खाते ही देखते आए हैं. शर्मा जी घर पर बर्तन धोते व बुनाई करते नजर आते हैं. लेकिन बाबा का पच्चीसवां जन्मदिन उनकी जिंदगी में उथल पुथल मचा कर रख देता है. अपने 25वें जन्मदिन पर बाबा को उसके पिता बताते हैं कि वह सर्वाधिक चर्चित हिटमैन यानी कि हत्याएं करने में माहिर चार्ल्स हैं. इतना ही नही शर्मा बताते हैं कि पैसा लेकर हत्या करने का यह धंधा उनका काफी पुश्तैनी धंधा है. इस धंधे में वह 12 पीढ़ी के नुमाइंदे हैं और अब तेरहवीं पीढ़ी यानी कि बाबा भी यही धंधा करेगा. पर बाबा इंकार कर देता है, वह कहता है कि वह तो काजू की दुकान पर ही बैठेगा, क्योंकि उसे एंजिला मोरिस से शादी करनी है.

चारूदत्त शर्मा पैसे का सौदा होने पर आधा पैसा एडवांस में लेकर हत्या करते हैं, बाकी पैसा हत्या होने के बाद लेते हैं. लेकिन वह सामने वाले से कहते हैं कि वह पैसा वह रेलवे स्टेशन पर बने लाकर में रख दे. लाकर कुछ इस तरह से है कि उस लाकर का पिछले दरवाजे के लाकर का नंबर अलग है, तो पीछे वाले दरवाजे पर चाभी लगाकर वह पैसा निकालते रहते हैं. इस तरह वह लोगों के सामने नहीं आते हैं.

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