Caste Discrimination: बहुत सख्त कानूनों और कोशिशों के बाद भी दलित प्रताड़ना के मामले कम नहीं हो रहे. जाहिर है इस की वजह तो धर्म ही है जिस ने दलित प्रताड़ना को धर्म का हिस्सा घोषित कर रखा है हालांकि एससीएसटी एक्ट के वजूद में आने के समय से ही दबंगों की मनमानी पर लगाम लगी है लेकिन गिरफ्तारी और जमानत को ले कर कुछ सवाल अभी भी जवाब के मुहताज हैं.

23 वर्षीय गोलू अहिरवार भले ही विकलांग है लेकिन देखने में बेहद स्मार्ट और सलीके से रहने वाला है. बुन्देलखंड इलाके के दमोह जिले के बिजोरी पाठक गांव के इस दलित युवा की शादी की रस्में 21 अप्रैल को हंसीखुशी, नाचगाने के साथ हो रही थीं. एक रस्म होती है रछ्वाई या बिन्नाई की जिस में दूल्हा घोड़े पर सवार हो कर पूरे गांव का चक्कर लगाता है. उस दौरान घोड़े की लगाम उस की बूआ या बहन पकड़ कर चलती है. यह ‘मिनी बरात’ कुछ दूर लोधी महल्ले पहुंची ही थी कि कुछ मोटरसाइकिल सवारों ने उस का रास्ता रोक लिया.

गोलू के घर वालों ने उन लोगों से रास्ता छोड़ने के लिए कहा तो वे लोग बिफर पड़े और मारपीट करने लगे. गोलू को घोड़े से घसीट कर नीचे उतार दिया. उस ने इस का विरोध किया तो दबंगों में से एक ने जातिसूचक शब्दों का इस्तेमाल करते नफरत से कहा कि तुम्हारी जाति के लोगों को घोड़े पर बैठने का हक नहीं. इतना कहने के साथ ही उन दबंगों ने जमीन पर पटक कर गोलू की कुटाई शुरू कर दी. जो भी उसे बचाने आया उसे भी कूटा. इन में गोलू की बहन मनीषा भी शामिल थी. उसे तो और भी ज्यादा बेरहमी से पीटा गया और उस के गहने भी छीन लिए गए.

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