Asha Bhosle: सुरों से बंधी एक बागी आवाज बालों में हमेशा मराठी महिलाओं की पहचान वाला गजरा गूंथे रखने वाली आशा भोसले की जिंदगी संघर्षों से भरी थी. किशोरावस्था के एक गलत फैसले की सजा उन्होंने भुगती भी लेकिन कभी भी उस अप्रिय फैसले को अपने व्यक्तित्व और पेशे पर हावी नहीं होने दिया. वे पहली गायिका थीं जिन्हें कथित अश्लील गाने के आरोपों के चलते कट्टरवादियों का विरोध झेलना पड़ा था लेकिन वे झुकी किसी के सामने न थीं.

1950 के दशक में हर वो गाना जो भजन नहीं होता था या थोड़ा सा भी गैरधार्मिक होता था उसे अश्लील करार दे कर होहल्ला हिंदूवादी मचाने लगते थे. तब देश आजाद हुए थोड़ा ही वक्त गुजरा था. हर तरफ पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू की धूम थी. तब संघी, जनसंघी और महासभाई हिंदू कोड बिल को ले कर उन पर खार खाए बैठे थे. उन्हें हर वो बात जो औरतों व दलितों के हक की होने के अलावा आधुनिक, तार्किक, खुली सोच वाली और वैज्ञानिक लगती थी उसे वे पाश्चात्य कहते और धर्म व संस्कृति के खतरे में होने की दुहाई देते हायहाय करने लगते थे.

फिल्म इंडस्ट्री भी इस सनातनी माफिया से अछूती नहीं बची थी बल्कि उस पर तो खास निगाहें धर्म और संस्कृति के तथाकथित लंबरदारों की रहती थीं. क्योंकि अखबारों और पत्रिकाओं के बाद फिल्में समाज पर गहरा असर डाल रहीं थीं. सिनेमा तब आम लोगों की पहुंच से लगभग बाहर था. लेकिन एलीट क्लासी लोगों और मध्यवर्गीयों के मनोरंजन व टाइमपास का खजाना ठीक वैसे ही था जैसे आजकल सोशल मीडिया प्लेटफौर्म और इंटरनैट हैं.

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