120 Bahadur Movie Review : आजकल तीसरे विश्वयुद्ध की संभावना के बादल दुनिया पर मंडरा रहे हैं. कई देश आपस में लड़ रहे हैं. परमाणु परीक्षण हो रहे हैं, खासकर अमेरिका और रूस में तो आपस में ठन गई है. पहले सिर्फ रूस-यूक्रेन युद्ध हो रहा था मगर जब से अमेरिका में खब्ती राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सत्ता संभाली है, तब से उस ने कई देशों को आपस में भिड़ा दिया है ताकि युद्ध चलता रहे और अमेरिका के हथियार लगातार बिकते रहें.

ऐसे दौर में वार फिल्में भी कुछ ज्यादा बनने लगी हैं. पहले कोई वार फिल्म कभी कभी ही देखने को मिलती थी. तब लोग देशभक्ति का गाना गुनगुनाया करते थे- ‘कर चले हम फिदा जान ओ तन साथियों, अब तुम्हारे हवाले वतन साथिय’. 1964 में आई फिल्म ‘हकीकत’ का यह गाना आज भी गुनगुनाया जाता है.

उस के बाद ‘हिंदुस्तान की कसम’, ‘बौर्डर’ जैसी न जाने कितनी वार फिल्में बनीं और सराही गईं. फरहान अख्तर की ‘120 बहादुर’ फिल्म पर ‘बौर्डर’ फिल्म का प्रभाव साफ दिखता है. ‘बौर्डर’ फिल्म 1971 के युद्ध पर आधारित थी. इस फिल्म को देखने के लिए इतनी भीड़ थिएटरों में उमड़ी कि संभाले न संभल सकी. फिल्म ‘120 बहादुर’ लद्दाख के रेजांग ला दर्रे के पास हुए भारत चीन युद्ध पर बनी है.

1962 के भारत चीन युद्ध के दौरान रेजांग ला दर्रे में चीनी सैनिकों ने एक भारतीय चौकी पर हमला कर दिया था. कठोर परिस्थितियों में भी भारतीय जवानों ने हार न मानी और चीनी सैनिकों का मुकाबला किया. कई चीनी सैनिकों को मौत के घाट उतार दिया था.

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