Gen Z Mindset: “होते कौन हैं वे ये सब कहने वाले, हू गेव हिम राइट्स टू स्पीक अबाउट मी, हूएवर दिस पर्सन आई डोंट वांट हिम इन योर कौन्टैक्ट लिस्ट, मौम एंड नौट इन अवर होम. सच नैगेटिव पीपल्स आर कर्स टू अवर सोसाइटी.” गुस्से में तिलमिलाते हुए मैं जोरजोर से चिल्ला रही थी और मां मुझे चुप कराने की नाकाम कोशिश कर रही थी.
“रिया, काम डाउन. मुझे नहीं पता था कि वे इस तरह रिऐक्ट करंगें. अदरवाइज, मैं फोन ही पिक न करती. बट, देयर इज नो नीड औफ सो मच एंगर. उन की बातें हमें चिपक गईं क्या? या हम उन के जैसे हो गए? किसी की भी बात पर इस तरह के हाइपर रिऐक्शन की कोई जरूरत नहीं होती. सो, प्लीज, काम डाउन.” मां ने मुझे शांत करते हुए कहा.
“अरे क्या फोन पिक न करतीं, जैसे ही वे अपनी गंदी जबान से इस तरह की लैंग्वेज का इस्तेमाल कर रहे थे, आप ने क्यों नहीं उन्हें डांटा, कि आप इस तरह से कैसे बातें कर सकते हैं और वो होते कौन हैं हमारे बारे में इस तरह की बातें करने वाले. पर नहीं, आप तो बस जीजीजीजी कर रही थीं जैसे कि उन की बातें आप को बहुत पसंद आ रही हों. यू हैव टू डिस्कनैक्ट द फोन ऐट दैट टाइम. वाह्य यू वर लिस्निंग हिम?” मैं ने कहा.
“नहीं बेटा, बड़ों के लिए इस तरह की लैंग्वेज का इस्तेमाल नहीं करते. आफ्टर औल, वे रिश्ते में तुम्हारे पापा के बड़े भाई हैं. मैं ने उन्हें अपनी कौन्टैक्ट लिस्ट में ब्लौक कर दिया है. उन की बेतुकी बातों के बदले चार बातें उन्हें फोन पर सुना कर क्या मैं उन की सोच को बदल दूंगी. उन की सोच उन के साथ, हमारी सोच हमारे साथ.” मां ने फिर से अपने लौजिक देते हुए मुझे समझाने की कोशिश की.
“आप जेनरेशन एक्स की यही तो प्रौब्लम है, मौम. हर बात में झुकना जानते हैं आप लोग और आप लोगों के ये थोथे लौजिक्स मुझे न कभी पसंद आए हैं और न कभी आएंगे. गलत बात का तुरंत विरोध करना चाहिए न कि बस चुपचाप सुन कर बोलने वाले को और अधिक बढ़ावा देना चाहिए. आगे से मुझे यह इंसान अपने घर में नहीं चाहिए, बस.” यह कह कर मैं कानों में ईयरफोन ठूंस कर अपनी फ्रैंड के साथ गुस्से से बड़बड़ाते हुए शौपिंग पर चली गई.
वैसे तो मेरा वर्क फ्रौम होम है, सुबह उठ कर रोजमर्रा के काम करतेकरते ही मेरे औफिस का टाइम हो जाता है और मैं अपने कमरे में लैपटौप से चिपक जाती हूं. फिर बस दिन में 2-3 बार मां को मेरे दर्शन होते हैं पर आज मेरी छुट्टी थी. सो, मैं घर पर ही थी.
मैं और मां दोनों सुबह की चाय के साथ गपें कर रहे थे कि आगरा के पास के गांव में रहने वाले मेरे पापा के रिश्ते के बड़े भाई का फोन आ गया था. मां ने इतनी कोशिश की थी कि मैं उन की और ताऊजी की बातों को न सुन पाऊं पर फोन स्पीकर पर था और सारी बात सुन कर मैं एकदम बौखला सी गई थी. मां जानती थी कि फोन पर उन की बातें सुन कर मैं ऐसा ही रिऐक्ट करूंगी पर अब चूंकि मैं ने सारी बातें सुन ही ली थीं तो उन के पास उन का बचाव करने के लिए कुछ बचा भी नहीं था.
वैसे सच कहूं तो मैं मानती हूं कि मां को खुद भी उन की इस तरह की बातें पसंद नहीं आई थीं. इसीलिए मां ने उन्हें ब्लौक भी कर दिया था.
हुआ यह था कि अभी कुछ दिनों पहले मां और मैं एक इवैंट में गए थे जिस में मैं ने एक वन पीस पहना था और मां ने सूट. मैं ने कुछ तसवीरें अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर और मां ने व्हाट्सऐप स्टेटस पर अपलोड की थीं.
आगरा में रहने वाले उस के ताऊजी ने वे तसवीरें देखीं और मां को डायरैक्ट कौल किया, “नीता, क्या घर में कपड़े नहीं हैं या फिर तुम्हारे पास ढंग के कपड़े खरीदने के पैसे नहीं हैं जो रिया को इतने छोटेछोटे कपड़े पहनाती हो. अरे, अपनी संस्कृति भी तो कोई चीज होती है. लड़की की जात है, जरा संभाल कर रखो. शहर में क्या रहने लग गए तुम लोग, अपनी हिंदू संस्कृति को ही भूल गए हो.”
मां ने फोन को सुन कर भी अनसुना कर दिया था और फोन काटने के बाद उन्हें ब्लौक भी कर दिया था. पर उन की बात सुन कर मैं गुस्से से चोट खाई नागिन जैसी फुंफकारने लगी. बड़ी मुश्किल से मां मुझे शांत कर सकी थी. उन्हें लगता है कि हम जेनजी वालों की सब से बड़ी प्रौब्लम यह है कि हम किसी की भी बात को सुनना नहीं चाहते, न ही किसी को एक बात उधार देना चाहते हैं. वे कहती हैं कि तुम लोगों को कौन समझाए कि जिंदगी ऐसे क्रोध और आवेश से नहीं चलती. विनम्रता और सहनशक्ति जिंदगी को भलीभांति जीने के ऐसे सूत्र हैं जो आप के पास होने ही चाहिए. हालांकि मां समयसमय पर मुझे समझाती रहती हैं पर हम जेनजी वाले किसी की गलत बात सुनना नहीं चाहते.
खैर, कुछ देर बाद मैं वापस आई तो मां मेरी पसंद के भुट्टे के पकौड़े बना कर रख चुकी थी और अपना मनपसंद टीवी सीरियल देखने लग गई. मैं जैसे ही आई, पकौड़ों पर टूट पड़ी.
खातेखाते मैं फिर ताऊजी को याद कर के बोली, “मां, यह बताओ कि ये दीपक ताऊजी को जो मेरे कपड़ों से अपनी संस्कृति याद आ रही है तो अपने घर में जब ड्रिंक कर के ताईजी को मारते थे तब अपनी संस्कृति याद क्यों नहीं आई. कौन से ग्रंथों में शराब पी कर अपनी बीवी पर हाथ उठाना सही बताया गया है.
“डबल एमए पास रीना ताईजी आज भी ताऊजी के सामने अपनी जबान नहीं खोल पातीं बड़े आए खुद को संस्कारी बताने वाले. बताइए जरा अपनी बीवी की इज्जत न करना, उसे अपनी मनपसंद का काम न करने देना कहां का कल्चर है. ये खुद अपनी बीवी को गंदीगंदी गालियां देते हैं जिस से वे इन्हें जरा भी नहीं पूछतीं. एक ही घर में रहने के बाद भी इन की और ताईजी की आपस में बोलचाल तक नहीं है बड़े आए संस्कृति के रखवाले. घर की औरतों ने तो इन की बकवास सुननी बंद कर दी है, इसलिए दूसरों के घरों की महिलाओं पर रोब जमाना शुरू कर दिया है.”
“अरे, जाने दो न, रिया. किसी भी बात की इतनी बाल की खाल मत निकालो कि सामने वाले की नैगेटिविटी हमें ही इफैक्ट करने लग जाए. तुम बताओ क्या शौपिंग कर के लाई हो?” कह कर मां ने मुझे नौर्मल करने की कोशिश की. मां की बात सुन कर मैं ने अपने साथ लाए पैकेट्स को खोलना शुरू कर दिया. एक ड्रैस पर जा कर मां की नजरें खटक गईं.
“रिया, यह क्या है?”
“मौम, दिस इज क्रौप टौप,” मैं ने उस स्टाइलिश गुलाबी रंग के क्रौप टौप को खोल कर अपने ऊपर डिस्प्ले करते हुए कहा, “क्यों, आप को अच्छा नहीं लगा?” मेरे टौप को देख कर मां की चढ़ी त्योरियां देख कर मैं बोली.
“मौम, आजकल यही ट्रैंडिंग है. आप को फैशन नहीं पता, इसलिए ऐसी बातें करती हो. देखो, मैं आप को पहन कर बताती हूं.” थोड़ी ही देर में अच्छेखासे डीप नेक, स्लीवलेस और बैकलेस टौप को पहने मैं मां के सामने थी.
“देखो, कितना अच्छा लग रहा है,” कह कर मैं ने मानो जबरदस्ती मां से हां कहलवाना चाहा था.
“बेटा, मुझ से जबरदस्ती हां कहलवाने की कोशिश मत करो. मुझे तो अजीब सा लग रहा है. ऐसे कपड़े पहन कर तुम कहां जाओगी. जहां भी जाओगी, लोगों की गंदी नजरों का सामना करोगी,” मां ने कहा.
“तो क्या, लोगों के डर के कारण मैं फैशनेबल कपड़े ही पहनना बंद कर दूं. आप भी न मैन, कितनी पुरानी सोच रखती हो. लोग अपनी नजरें बदलें, न कि हम अपना ड्रैसिंग सैंस,” कह कर मैं अपनी उस ड्रैस पर शीशे के सामने इठलाने लगी.
“बेटा, इस तरह के लौजिक्स सिर्फ कहने के लिए होते हैं. हम दूसरे को नहीं केवल ख़ुद को ही तो बदल सकते हैं. कोई घटनादुर्घटना का शिकार तो हम होंगे न. प्रैक्टिकल और थ्योरी में बहुत अंतर होता है. देखो, हीरोइंस जब इस तरह की ड्रैसेज पहनती हैं तो वह फैशन बन जाता है क्योंकि उन्हें कोई घूरता नहीं है और अगर कोई घूरने का दुस्साहस भी करेगा तो उन के बौडीगार्ड उस की ऐसीतैसी कर देंगे. लेकिन वही ड्रैस जब सामान्य लड़की पहनती है तो वह वल्गैरिटी कहलाती है. उसे लोगों की गंदी सोच और गंदे व्यवहार का सामना करना पड़ता है. यह फरेन नहीं, इंडिया है. यहां की सोसाइटी की सोच बिलकुल अलग होती है. यहां दूसरों से खुद को बचाना भी एक बहुत बड़ी चुनौती होती है,” मां बड़ीबूढ़ी पीढ़ी की बातें दोहराते बोलीं.
मुझे मां की बात कितनी समझ में आई कितनी नहीं लेकिन शायद मां को अपनी बात कहनी थी, सो उन्होंने कह दी थी. मां का शायद सोचना यह है कि बच्चों को भलेबुरे के बारे में बताना जरूरी है ताकि वक्तबेवक्त किसी मुसीबत में फंसने पर वे अपने आंखकान खुले रख सकें.
मां की बातों पर अपना बुरा सा मूड और असंतुष्टि के भाव से मैं अपने कल के औफिस की तैयारी करने चली गई. मैं जेनजी का प्रतिनिधित्व कर रही हूं. जेनजी यानी 1997 से 2012 के बीच जन्म लेनी वाली पीढ़ी. मैं अपने मिलेनियल भाई से 3 साल छोटी हूं. आजकल की हम जेनजी पीढ़ी के पास अपार ज्ञान का खजाना तो है ही, साथ ही, अनगिनत समस्याओं का भंडार भी है.
डिजिटली हम अपनी पुरानी पीढ़ियों से बहुत आगे हैं पर हमारी समस्या यह है कि हमारी समस्याओं का समाधान करने वाला ऐसा कोई नहीं है जो हमें संतुष्ट कर सके. मां की पीढ़ी सोचती है कि जेनजी के पास थियोरेटिकल ज्ञान तो है पर प्रैक्टिकैलिटी का उतना ही अभाव है जिस से वह ज्ञान किसी काम का नहीं रहता. यह उन कि मिस्टेक है, मैं या मेरी पीढ़ी क्यों भुगते?”
सब को डिनर करा कर मां अभी सोने की तैयारी ही कर रही थी कि अचानक से मेरे पास एक फोन आया. सुन कर मैं दौड़ती हुई मां के पास आई और उन से चिपक कर रोने लगी. मुझे यों रोता देख मां घबरा गई.
मां बोली, “क्या हुआ, रिया, इस तरह रो क्यों रही हो?”
“मम्मीमम्मी, वो सेजल है न, उस की मौम आज एक्सपायर हो गईं. उस की मौम को साइलैंट अटैक आ गया. वे रात को खाना खा कर और सेजल को गुडनाइट कह कर सोई थीं पर सुबह उठीं ही नहीं. शी वाज क्राइंग वैरी मच. मौम, शी इज एलोन. मौम, अब वह अकेली कैसे रहेगी?”
“ओह, वैरी सैड,” कहते हुए मां ने मुझ को अपने सीने से चिपका लिया.
“ठीक है, बेटा. यह लाइफ है. ये सब तो जिंदगी के पार्ट्स होते हैं, बेटा. चुप हो जाओ, कल हम उस के घर चलेंगे. अभी तुम सो जाओ. ओके.”
“मौम, क्या मैं आज आप के रूम में सो सकती हूं. ऐट दिस टाइम, आई कांट स्टे अलोन. मुझे बहुत डर लग रहा है. मुझे, बस, आप के साथ सोना है. डैड और आप को कोई प्रौब्लम तो न होगी न,” मां ने डर के कारण कहा.
“हांहां, क्यों नहीं. यह कोई पूछने वाली बात है.” हर बात पर खुद को ही सही समझने वाली हम जेनजी का यह भोला सा रूप लगता है मां को बड़ा पसंद आया.
अगले दिन मां और मैं सेजल के घर पहुंचे. सेजल और मैं ग्रेजुएशन में क्लासमेट थीं. मैं एक मल्टीनैशनल कंपनी में काम करने लगी थी वहीं सेजल अभी कौम्पिटीटिव एग्जाम दे रही थी. मां के जाने के बाद सजल एकदम मुरझा सी गई थी. सन्नाटेभरे घर में अब उस के घर में केवल पिता और बेटी ही बचे थे. सो, सच में उन्हें देख कर शायद मां का दिल भर आया. हम दोनों का ही रोरो कर बुरा हाल था.
वापस लौटते हुए मैं बहुत उदास थी. अचानक मैं ने मां से कहा, “मां, आप और डैड बहुत अच्छे पेरैंट्स हो.”
“क्यों, ऐसा क्यों कह रही हो?” मां ने चौंकते हुए कहा.
“मौम, आप को पता है जब हम लोग कालेज में थे तब सेजल हमेशा दुखी होती थी और मुझ से कहती थी,
‘रिया, तू कितनी लकी है जो तेरे पास तेरा भाई है. मेरे पास कोई भी नहीं है जिस से मैं अपने मन की बातें शेयर कर सकूं, जिस के साथ मैं झगड़ा कर सकूं.’ मौम, इसीलिए वह संडे को भी स्कूल आना चाहती थी. उस के मम्मीपापा दोनों ही वर्किंग थे. सो, घर का अकेलापन उसे काटने को दौड़ता था. वह हमेशा कहती थी कि पता नहीं क्यों मेरे मम्मीपापा ने सिंगल चाइल्ड को ही प्रायोरिटी दी. वह बहुत अकेली हुआ करती थी हमेशा. अब तो उस की मम्मी भी चली गईं, क्या करेगी बेचारी.
“मौम, पेरैंट्स सिर्फ अपने बारे में ही क्यों सोचते हैं. वे दोनों वर्किंग हैं तो 2 बच्चे पाल नहीं पाएंगे तो एक ही बच्चा करेंगे. पर व्हाई दे नेवर थिंक अबाउट अ चाइल्ड कि उन के जाने के बाद उस के लिए जिंदगी जीना कितना मुश्किल हो जाएगी. अब देखिए न, सेजल कितनी अकेली हो गई है. अगर कभी उस के पापा को भी कुछ हो गया तो वह बेचारी क्या करेगी,” अपनी बात कहते कहते मेरा गला भर आया था.
मेरी बातें सही थीं. हमारी पीढ़ी के अधिकांश बच्चे अकेले हैं, हमारा साथी सिर्फ मोबाइल और टीवी हैं, मातापिता दोनों वर्किंग हैं और हम अकेले, निपट अकेले. हमारा का इकलौता साथी मोबाइल न तो हमें कोई ज्ञान दे पाता है और न ही किसी जिज्ञासा को शांत कर पाता है. हम करें, तो करें क्या.
“कोई बात नहीं, बेटा. यह संसार है, तू तो अकेली नहीं है न, मेरी बच्ची,” कह कर मां ने मुझे अपनी बांहों में भर लिया. उस दिन रात में सोने से पहले एकदूसरे के गले में बांहें डाल कर मांबेटी ने जम कर बातें कीं.
मै मां से बहुत खुली थी. मैं अपनी सारी बातें उन से जब तक शेयर न कर लेती थी मुझे चैन न मिलता था. शाम को मेरे कहने पर मां व मैं दोनों एक मूवी देख कर आए. अगले दिन सुबह उठ कर मैं अपने औफिस में लग गई. पापा को औफिस भेज कर मां भी नाश्ता करने बैठी. तभी मां का फोन बज उठा. मैं सुन रही थी. मां अकसर फोन को स्पीकर पर रखती थीं चाहे घर में कोई भी हो.
फोन पर पड़ोस में रहने वाली मां की फ्रैंड की बेटी मनु ने किया था. जैसे ही मां ने हेलो किया, मनु जोरजोर से रो रही थी, बोली, “आंटी, प्लीज, आप जल्दी से घर आ जाओ. प्लीज आंटी, कम सून.”
नाश्ते की प्लेट को ढक कर मां दौड़ती हुई अपने बगल के ब्लौक में रहने वाली फ्रैंड के घर पहुंची. मैं भी पीछेपीछे गई. मनु को देख कर घबरा गईं. मनु के बेड पर उस का प्यारा डौगी ‘कुकी’ लगभग मरणासन्न अवस्था में पड़ा था और मनु दीवार के सहारे खड़ी बुरी तरह से कांप रही थी. उस के हाथपैर एकदम सुन्न और चेहरा एकदम सफेद हो गया था. ऐसा लग रहा था मानो उसे कोई दौरा पड़ा हो.
मुझे देखते ही वह दौड़ कर मुझ से लिपट कर फूटफूट कर रो पड़ी और फिर मां से कहा, “आंटी, कुकी कुछ बोल नहीं रहा. वह मूव नहीं कर रहा, आंटी. आंटी, देखिए न, इसे क्या हो गया है. मैं कुकी के बिना नहीं रह पाऊंगी.”
“मम्मीपापा कहां हैं, बेटा?’ मां ने घबरा कर पूछा.
“मौम, डैड आर इन औफिस.”
मां और मैं ने किसी तरह उसे संभाला और उस की मम्मी को फोन कर जल्दी ही घर आने के लिए कहा. जब तक मनु की मम्मी नहीं आईं, तब तक मैं और मां मनु के पास ही रहे.
जैसे ही मनु की मम्मी ने कमरे में प्रवेश किया, मनु उन से लिपट कर इस तरह रोने लगी मानो घर के किसी सदस्य की ही मृत्यु हो गई. खैर, किसी तरह हम अपने घर आ गए. मैं ने किचन में 2 कप चाय बनाई और एक कप मां को दी. मां बोली, “मनु तो ऐसे रो रही थी मानो उस के मम्मीपापा में से किसी की डैथ हो गई हो. अरे, कुत्ता ही तो है, इतना क्या आंसू बहाना?”
“मौम, प्लीज, कभी मनु के सामने इस तरह की बातें मत करना. वह उस का पैट नहीं था, उस के सुखदुख का साथी था, यू नो. यू इमेजिन, जिस के मम्मीपापा सुबह 9 बजे जा कर रात को 8 बजे आते हों, वह बच्चा कितना अकेला होता होगा. आप को पता है, मम्मी, मनु कहती है कि उस के मम्मीपापा उसे टाइम नहीं देते, इसीलिए उस की हर इच्छा को पूरी कर देते हैं. आप को पता है, मनु का पैट पूडल ब्रीड का था जो बहुत कौस्टली होता है. 10 दिन का था जब मनु उसे ले कर आई थी और 40,000 रुपए का था तब वह,” मैं ने मां की नौलेज बढ़ाई.
“अच्छा, इतना कौस्टली डौगी था वह, इतना महंगा क्यों लिया उस ने और उस की मम्मी ने क्यों दिलवाया?” मां ने हैरत से पूछा.
“आप को तो पता ही है कि मनु अपनी दीदी से 2 साल छोटी है पर उस की दीदी और उस में जरा भी नहीं पटती. मनु कहती है कि उस की दीदी बहुत जिद्दी है और हर हाल में वह अपनी इच्छा पूरी करवाती है. उस ने ही अपनी एक फ्रैंड को देख कर इस ब्रीड का पैट लिया था.
उस की मम्मी और पापा जौब के बाद बहुत सी पार्टियों में व्यस्त रहते हैं, इसलिए मनु और उस की दीदी की सारी बातें मान लेते हैं. अब पिछले साल अनु दीदी की जौब लग गई. सो, वे पूना चली गईं. इस तरह कुकी मनु का सब से अच्छा साथी बन गया था. पता नहीं अब उस का क्या होगा,” मैं ने एक लंबी सी सांस लेते हुए मां को बताया.
आधा दिन तो मनु और उस के पैट कुकी के बारे में बात करते हुए ही गया. दोपहर में थोड़ा आराम करने के बाद मां डिनर की तैयारी कर रही थी कि मनु की मम्मी रागिनी का फोन आया.
“तू, जल्दी मेरे घर आ.”
वह लगभग रो रही थी. सो, गैस बंद कर के मां ने मनु के घर की तरफ दौड़ लगा दी, मैं भी लैपटौप बंद कर मां के पीछे चल दी. जैसे ही हम पहुंचीं, मनु के पापा और मम्मी बदहवास से बाथरूम का दरवाजा पीट रहे थे.
हमें देखते ही रागिनी आंटी बोलीं, “देख न कितनी पागल लड़की है एक घंटे से खुद को बाथरूम में बंद कर रखा है, कोई जबाब भी नहीं दे रही. मेरी बच्ची को कुछ हो गया तो मैं कैसे जिंदा रहूंगी?”
मेरे और मां के बहुत आवाज लगाने पर भी जब मनु ने दरवाजा नहीं खोला तो मां ने फटाफट से सोसाइटी के गेट पर कौल कर के गार्ड को बुलाया. गार्ड ने दरवाजा तोड़ा तो अंदर रिया की हालत देख कर हम सब घबरा गए क्योंकि रिया ने अपने हाथ की नस काट ली थी और बेहोश पड़ी थी. जैसेतैसे उसे हम एंबुलैंस में डाल कर नजदीकी हौस्पिटल ले गए.
डाक्टर ने 4-5 घंटे का खतरा बताया. 2 बोतल खून चढ़ा. अब तक मेरे पापा भी हौस्पिटल आ गए थे. हम सभी सांस रोके 5 घंटे बीतने का इंतजार करते रहे. सुबहसुबह होतेहोते मनु को होश आ गया था परंतु आंखें खोलते ही वह रोते हुए बोली, “मेरा कुकी चला गया. आई कांट लिव विदाउट हिम. आई डू नौट वांट टू लिव एलोन.” इतना कह कर उस ने फिर से आंखें मूंद ली थीं.
मां हैरान थी इतने घंटों के बाद होश में आई मनु की जबान पर मातापिता की जगह एक पैट का नाम था. क्या पेट मातापिता से ज़्यादा इंपोर्टेंट था. मैं जानती थी कि शायद हां क्योंकि अपनी व्यस्तता के बीच आज के पेरैंट्स अपने किशोर बच्चों को न समय दे पा रहे हैं और न ही उन्हें सहीगलत का भान करा पा रहे हैं. नतीजतन, हम जेनजी के लोग मानसिक और भावनात्मक रूप से बहुत कमजोर होते जा रहे हैं और छोटीछोटी बातों पर सुसाइड जैसा भारीभरकम स्टैप उठा लेते हैं.
मनु को होश आ गया था तो मैं मां और पापा के साथ घर वापस आ गई. रास्ते में मां ने मेरे मन में उठ रहे विचारों को टटोलने के मकसद से कहा, “कितनी बेवकूफ लड़की है, मनु. इतनी छोटी सी बात पर कोई सुसाइड करता है क्या. अरे, कुत्ता ही तो है, दूसरा आ जाएगा.”
मैं ने थोड़े गुस्से में जवाब दिया, “मम्मी, फिर आप ने पेट को कुत्ता कहा. सुसाइड नहीं करेगी तो और क्या करेगी, बेचारी. उस के मौम, डैड और दीदी खुद में बिजी हैं. मौम, हर बच्चा एकजैसा नहीं होता. अनु दीदी तो हमेशा अपने दोस्तों में ही बिजी रहती थीं और इसीलिए वे अंकलआंटी की फैवरिट बेटी भी थीं. अंकलआंटी उस की हर जिद को पूरी करते थे.
“आप को पता है, टेंथ क्लास में आंटीअंकल ने उन्हें आई फोन ले कर दिया था पर मनु बहुत इमोशनल है, उसे बहुत ज़्यादा दोस्त पसंद नहीं. जब भी वह अंकलआंटी से अपनी बात कहना चाहती है न, तो वे हमेशा अनु दीदी का एग्जाम्पल देते हुए उस से कहते हैं- “क्या हरदम समस्यायों का रोना रोती रहती हो. अनु से सीखो, अपने दोस्तों में बिजी रहती है. जो तुम्हें चाहिए, ले लो लेकिन हमें डिस्टर्ब मत करो.” वह मुझे सारी बातें बताया करती थी.
“एक कुकी ही तो था, जिस से उस का टाइम पास होता था. जो बिना कहे उस की सारी बातें समझ लेता था. क्या नए पैट से इतना अच्छा बौंड हो पाएगा उस का. जब किसी को उस की पड़ी ही नहीं है तो फिर तो उस की जगह कोई भी होगा, वह सुसाइड ही करेगा न.” रिया ने मनु के कदम को लगभग सही ठहराते हुए कहा.
“पर बेटा, इस तरह तो…” मां के वाक्य को पूरा होने देने से पहले ही मैं ने मुझे टोक दिया, बोली, “मम्मी, आप नहीं समझोगी, इसलिए, प्लीज अब अपने लौजिक्स मत देना.”
“ओके ठीक है,” कह कर मां ने चुप रहने में ही अपनी भलाई समझी क्योंकि हम जेनजी हैं जो बातों और मोरल्स से नहीं, केवल तर्कों से समझती हैं. पर मैं और मनु अपनी जगह गलत भी तो न हैं. हमें पुरानी पीढ़ी हमेशा अपने सांचे में ढालने में क्यों लगी रहती है. Gen Z Mindset




