Ram Mandir Controversy: अयोध्या अगर वैष्णव सनातनियों की आस्था का बड़ा केंद्र है तो जंतर मंतर एक तरह से सरकारी मनमानियों और ज्यादतियों के खिलाफ अनास्था का केंद्र है जो कतई हर्ज की बात नहीं. लेकिन इन दोनों जगहों में बड़ा फर्क है इस फर्क से परे गौरतलब बात यह है कि भाजपा ने हमेशा यह कहते आसमान सर पर उठाए रखा था कि मंदिर `वहीँ` बनाएंगे. जबकि यह दावा कोई नहीं कर सकता कि बाबरी मस्जिद के नीचे ही राम का जन्म हुआ था और अगर हुआ मान भी लिया जाए तो वहां भव्य इमारत तानना क्या राम का अपमान नहीं है.

उसे तो ज्यों का त्यों रहने दिया जाना चाहिए था. लेकिन अरबों रु खर्च कर कथित जन्म स्थल से छेडछाड की गई तो इसकी वजह चढ़ावे का एक और बड़ा अड्डा स्थापित करना ही थी. राम के जन्म स्थान को `वहीँ` साबित करने कोई प्रमाण किसी के पास नहीं है यह सिर्फ श्रुति और स्मृति से उपजी आस्था के आधार पर चला आ रहा मिथक है. असल में राममन्दिर चढ़ावे का बड़ा अड्डा बना दिया गया है जिससे विप्रों को धन धान्य मिलता रहे यह साजिश लम्बे वक्त से चल रही थी अब चढ़ावा उम्मीद से कहीं इतना ज्यादा मिल रहा है कि उसमे चोरी डकैतिया होने लगी हैं इसके लिए इस बार बाहर से कोई मुगल या अंग्रेज नहीं आए हैं हाथ साफ़ करने बाले सभी रामभक्त ही हैं.

भगवा गैंग की मंशा बेहद साफ़ है कि विरोध के स्वर दबा दिए जाएँ और आस्था का शोर मचने दिया जाए ताकि वोट और नोट दोनों मिलते रहें. एक मनोविज्ञानिक पहलू यह भी है कि जो लोग अयोध्या आएंगे वे कभी जंतर मंतर जैसी जगह नहीं जायेंगे. क्योंकि वे भक्त होंगे जिन्हें तर्कों से कोई सरोकार नहीं रहता. वे तो सियाराम मय सब जग जानी करहुं प्रणाम जोरी जुग पानी.. गाते गुनगुनाते रहेंगे.

जंतर मंतर से संविधान के अनुच्छेदों का दम भरा जाता है जबकि अयोध्या में मानस की चौपाइयां गुंजायमान होती है जंतरमंतर कहीं भी शिफ्ट किया जा सकता है लेकिन अयोध्या नहीं जाहिर है यह जड़ता का प्रतीक है.

कट्टरवाद इसी जड़ता और जिद से पनपता है. जो जेन जी के प्रोटेस्ट के दौरान दिखा भी लेकिन ये आवाजें वहां से नहीं तो कहीं और से उठेंगी तब सरकार क्या करेगी.जाहिर है घोषित दमन और उजागर तानाशाही का ही रास्ता अपनाएगी जो आखरकार किसी भी चुनी गई सरकार का आखिरी हथकंडा होता है लेकिन सरकार के पतन की वजह भी वही बनता है. Ram Mandir Controversy

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