Madhya Pradesh Tribal Issue: देश भर में मध्यप्रदेश सर्वाधिक आदिवासी जनसंख्या बाला राज्य है जहाँ सबसे ज्यादा दुर्गति का शिकार भी आदिवासी ही होते हैं. ताजा उदाहरण सीहोर जिले की बुधनी तहसील के गाँव कोसमी का है जहाँ प्रशासन का बुलडोजर कोई दर्जन भर आदिवासी परिवारों के झोपड़ों पर चला तो गुस्साए आदिवासी धरने पर बैठ गए.

बुधनी केन्द्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान के संसदीय क्षेत्र भी है और गृह नगर भी है.

आदिवासियों का यह धरना तब जंतर मंतर सा बन गया जब खुद शिवराज सिंह भी आदिवासियों के साथ अपनी ही सरकार के खिलाफ धरने पर बैठ गए. उन्होंने इस काररवाई को `जुल्म की इंतिहा` बताते दोषी अधिकारीयों के खिलाफ मांग की तो भोपाल से लेकर दिल्ली तक सियासी माहौल गर्मा उठा. कुछ बड़ा होने बाला है. और क्या मोहन यादव जाएंगे और फिर से शिवराज आएंगे जैसी चर्चाए मीडिया और आम लोगों में होने लगी तो मुख्यमंत्री मोहन यादव अपने सीनियर के इस अप्रत्याशित हमले से बदले माहौल से बौखला उठे.

लेकिन एकदम झुकना उन्होंने गंवारा नहीं किया और ट्रेडिशनल टालमटोल टाइप की बातें वे करते रहे कि मैंने मामले की फाइल मंगवाई है और उचित काररवाई की जाएगी बगैरह बगैरह.

लेकिन वे भूल गए कि चेले के शक्कर हो जाने बाली बात मुहावरों और कहावतों में ही अच्छी लगती है. और सामने कोई एरा गैरा नहीं बल्कि एक वक्त में प्रधानमन्त्री पद के दावेदार रहे शिवराज सिंह चौहान हैं जो आमतौर पर शांत रहते हैं. लेकिन जब भडक जाते हैं तो नागपुर से ही मानते हैं. उनके मामले में मोदी- शाह भी कुछ नहीं कर पाते सिवाय कसमसाने के.

पेंच फस ही गया था इसलिए सुलझा भी उपरी दखल से ही, रास्ता यह निकाला गया कि सांप भी मर जाए और लाठी भी न टूटे. लिहाजा मोहन- शिवराज की बंद कमरे में डील हुई जिसे कुछ कुछ लोग मीटिंग भी कह रहे हैं.

मोहन यादव अकड़े ही रहते लेकिन जैसे ही इन आदिवासियों ने भोपाल की तरफ कुछ करना शुरू किया और प्रदेश भर के आदिवासी हल्ला मचाने लगे तो सरकार झुकी और आदिवासियों को भरोसा दिलाया कि बेघर हुए आदिवासियों को तुरंत पक्के घर बनवा कर दिए जाएंगे और तब तक उनके रहने खाने पीने का इंतजाम प्रशासन करेगा. इतना ही नहीं आदिवासियों की खेत में खड़ी फसलें कुचले जाने का मुआवजा भी सरकार देगी.

भोपाल आ रहे आदिवासी बीच रास्ते से ही वापस लौट गए जिन्हें अपने बेघर हो जाने और ठगे जाने का एहसास भी नही हुआ कि आखिर दो नेताओं की लड़ाई में उन्हें क्या मिला.वे तो पूरे खेल में हमेशा की तरह मोहरा बने रहे.

मारल आफ द स्टोरी

1 – सीजेपी के प्रोटेस्ट से आदिवासियों में भी चेतना आई है.
2 – शिवराज सिंह, शिवराज सिंह हैं उन्हें हल्के में नहीं लिया जाना चाहिए.
3 – वहैसियत मुख्यमंत्री मोहन यादव की हैसियत उस बहू जैसी है जिसे किचिन दिया जाता है तिजोरी की चाबी नहीं. और-
4 – प्रदेश कांग्रेस मौके पर चौका मारने का हुनर नहीं जानती इस संवेदनशील मामले में भी राहुल गाँधी के आने का इंतजार किया जा रहा है. Madhya Pradesh Tribal Issue

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