Neha Vora: 11 अक्टूबर 2026 को नेहा बोरा का एक वीडियो वायरल हुआ. 29 साल की नेहा बोरा, ओवरसाइज लाल टी-शर्ट, चश्मा, बाल बिखरे हुए, पुलिस ने इन्हें पकड़ कर वैन में बिठा लिया, नेहा अपने दोस्त का हाथ पकड़ चलती वैन से कूद गईं और पुलिस देखती रह गई. कैमरे पर नेहा ने चिल्लाते हुए कहा- “ये हमें कुत्ता, कीड़ा और कॉकरोच समझते हैं लेकिन हम भी इस देश के नागरिक हैं जिसे सवाल करने का हक है” इस वीडियो के वाइरल होते ही नेहा बोरा देश की प्रोटेस्ट पोस्टर गर्ल बन गई. यहां सवाल ये है कि एक टिपिकल हिंदू, आर्मी, बीजेपी सपोर्टर फैमिली की लड़की ने सत्ता को कैसे हिला दिया?
नेहा बोरा का जन्म उत्तराखंड के खटीमा में हुआ. पिता इंडियन आर्मी में हैं और मां होममेकर हैं. नेहा उस फैमिली से हैं जो हर चुनाव में बीजेपी को वोट देती है और इसे देशभक्ति समझती है. वही टिपिकल भारतीय हिन्दू परिवार जहां मंदिर जाना संस्कार माना जाता है और सवाल पूछना बदतमीजी समझी जाती है. नेहा का बचपन आर्मी क्वार्टर्स में बीता. पिता की नौकरी ऐसी थी कि शहर बदलते रहे. 10वीं-12वीं नॉर्थ बंगाल में की. वहीं पर उन्होंने चारू मजूमदार, पाब्लो नेरुदा और महाश्वेता देवी को पढ़ना शुरू किया. बीए सोशियोलॉजी हिंदू कॉलेज डीयू से की. एमए परफॉर्मेंस स्टडीज अंबेडकर यूनिवर्सिटी से और अब PhD जेएनयू के स्कूल ऑफ आर्ट्स एंड एस्थेटिक्स में कर रही हैं. विषय है “थिएटर एंड परफॉर्मेंस स्टडीज”. दिसंबर 2024 से नेहा वोरा AISA की नेशनल प्रेसिडेंट हैं.
नेहा खुद कहती हैं कि वो थिएटर से पॉलिटिक्स में आईं हैं. दिल्ली के संगवारी थिएटर ग्रुप में एक्टिंग करते हुए उन्होंने सीखा कि विलेन भी एक सोशल प्रोडक्ट है. यही थिएटर 2019 में उन्हें शाहीन बाग ले गया, जहाँ उन्होंने सत्ता के घमंड, जनता के अधिकार और प्रोटेस्ट की ताकत को गहराई से समझा.
जून-जुलाई 2024 में जब NEET-NET पेपर लीक हुआ तो धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग पर नेहा 23 दिन भूख हड़ताल पर बैठीं, इस दौरान उनका वजन 7 किलो घटा. इस प्रोटेस्ट के खत्म होते ही वो रांची JPSC-JSSC प्रोटेस्ट में गईं जहां उन पर स्याही फेंकी गई. नेहा ने उसी स्याही लगी टी-शर्ट में कहा- मैं ये दाग गर्व से पहनती हूं. यहीं से वह नेशनल क्रश बनने लगी थीं. अब अक्टूबर 2026 से नेहा CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ सड़क पर हैं.
नेहा वोरा जैसी क्रांतिकारी लड़कियां जेएनयू का इंटेक्चुअल प्रोडक्ट होतीं हैं. यही कारण हैं कि आरएसएस जेएनयू को टुकड़े-टुकड़े गैंग कहता है. आरएसएस का पूरा मॉडल धर्म पर टिका है और धर्म हमेशा से औरतों को संस्कार के नाम पर पूजा पाठ, व्रत और श्रृंगार में लपेटे रखना चाहता है. आरएसएस चाहता है कि आर्मी की बेटी आर्मी में न जाये बल्कि आर्मीमैन से शादी कर उसकी लम्बी आयु के लिए व्रत करे, हिंदू की बेटी स्कूल से पहले मंदिर जाए, बीजेपी सपोर्टर की बेटी कमल पर वोट दे और कोई भी लड़की जेएनयू जैसी यूनिवर्सिटीज तक कभी न पहुंच पाए. आरएसएस इसके लिए पूरा जतन करता है फिर भी कुछ लड़कियां जेएनयू तक पहुंच जाती हैं और होता यह है कि जेएननू उस हिन्दू फैमिली की बेटी को एक क्रांति की किताब थमा देता है.
दरअसल नेहा बोरा आज सिर्फ प्रोटेस्ट की पोस्टर गर्ल नहीं है बल्कि नेहा वह लड़की हैं जिन्होंने जेएनयू की किताब खोली और पूछा- क्या मेरा धर्म मेरे सवालों से बड़ा है? जिस दिन नेहा के मन में यह सवाल उठा उसी दिन JNU जीत गया और RSS हार हार गई. Neha Vora




