Gondhal Film: इतिहास बार बार अपने आपको दोहराता है. मगर हमारे सिनेमा को मजबूत करने का दावा करने वाली संस्था ‘‘फिल्म फेडरेशन आफ इंडिया’’ और इससे जुड़े लोगो ने कसम खा रखी है कि हम तो नही सुधरेंगे. हर वर्ष ऑस्कर में भारतीय प्रतिनिधि की फिल्म भेजने का निर्णय ‘फिल्म फेडरेषन आफ इंडिया’ की एक ज्यूरी करती है. 2024 में इस ज्यूरी ने पायल कपाड़िया की फिल्म ‘आल वी इमेजिन एज लाइट’ को नजरंदाज कर ‘फिल्म फेडरेषन आफ इंडिया’ ने आमिर खान की फिल्म ‘लापता लेडीज’ को ऑस्कर में भारतीय प्रतिनिधि फिल्म के रूप में भेजा था. उस वक्त चर्चाएं गर्म हुई थीं कि कि मोदी सरकार ने जब गजेंद्र चौहाण को पुणे फिल्म संस्थान का चेअरमैन बनाया था, तब पायल कपाड़िया स्टूडेंट थीं और उन्होने आंदोलन किया था. उसी की सजा के तौर पर उनकी फिल्म को रिजेक्ट किया गया. पर कुछ ऐसा हुआ कि पायल कपाड़िया की फिल्म ‘‘आल वी इमेजिन एज लाइट’ सीधे विदेषी भाषा की फिल्म के रूप में ऑस्कर में प्रतियोगिता खंण्ड में पहुॅच गयी. मजेदार बात यह हुई थी कि पहले ही राउंड में ‘लापता लेडीज’ ऑस्कर से बाहर हो गयी थी, जबकि पायल कपाड़िया की फिल्म अंतिम पांच फिल्मों तक पहुंची थी.

अब पूरे दो साल बाद इतिहास ने पुनः दोहराया है. 17 सितंबर को ‘फिल्म फेडरेषन आफ इंडिया’ ने नागालैंड के युवा फिल्मकार तेजो रियो( अंगेजी में नाम की स्पेलिंग का उच्चारण- थेजो रियो )  की फिल्म ‘‘अंग’’ को नजरंदाज कर मराठी फिल्म ‘गोधल’ को ऑस्कर में भेजने का ऐलान किया. पर तीन दिन बाद पासा ऐसा पलटा कि अब तीजो रियो की फिल्म ‘’अंग’’ भी  विदेषी भाषा की फिल्म कैटगरी’ में ऑस्कर पहुॅच गयी है. जी हॉ! बीस सितंबर को ‘‘टोरंटो इंटरनेषनल फिल्म फेस्टिवल’ में तीजो रियो की फिल्म ‘अंग’ को पुरस्कृत किया गया और इस पुरस्कार को पाने वाली फिल्म सीधे ‘ऑस्कर’ में पहुॅच जाती है. इस तरह ‘अंग’ भी ऑस्कर में पहुॅच गयी. और टोरंटो में इस बात का ऐलान भी कर दिया गया.

आगे की कहानी पढ़ने के लिए सब्सक्राइब करें

डिजिटल

(1 साल)
USD99USD49
 
सब्सक्राइब करें

सरिता सब्सक्रिप्शन से जुड़ेें और पाएं

  • सरिता मैगजीन का सारा कंटेंट
  • देश विदेश के राजनैतिक मुद्दे
  • 7000 से ज्यादा कहानियां
  • समाजिक समस्याओं पर चोट करते लेख
 

डिजिटल + 24 प्रिंट मैगजीन

(1 साल)
USD150USD129
 
सब्सक्राइब करें

सरिता सब्सक्रिप्शन से जुड़ेें और पाएं

  • सरिता मैगजीन का सारा कंटेंट
  • देश विदेश के राजनैतिक मुद्दे
  • 7000 से ज्यादा कहानियां
  • समाजिक समस्याओं पर चोट करते लेख
  • 24 प्रिंट मैगजीन
और कहानियां पढ़ने के लिए क्लिक करें...