Jantar Mantar Protest: भारत का संविधान नागरिकों को विरोध और प्रोटेस्ट का अधिकार देता है इसी अधिकार के तहत चुनाव आयोग के खिलाफ सीजेपी ने 10 अक्टूबर को जंतर मंतर पर धरना प्रदर्शन की अनुमति मांगी थी लेकिन अमित शाह की दिल्ली पुलिस ने अनुमति नहीं दी. 10 अक्टूबर को सुबह ही ध्रुवराठी को गिरफ्तार कर लिया गया. तकरीबन 11 बजे अभिजीत दीपके और सौरभ दास जैसे सीजेपी के बड़े नेताओं को भी गिरफ्तार कर लिया गया. साथ ही तक़रीबन 1000 से ज्यादा लोग हिरासत में लिए गये. 10 अक्टूबर को देश में दूसरी इमेरजेंसी से भी खराब स्थिति नजर आ रही है.

भारत का संविधान नागरिकों को विरोध का अधिकार देता है. अनुच्छेद 19(1)(a) और 19(1)(b) साफ कहता है कि हर नागरिक को शांतिपूर्ण तरीके से इकट्ठा होने और सरकार से सवाल पूछने का हक है. इसी संवैधानिक हक के तहत Citizens for Justice and Peace यानी CJP ने 10 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर चुनाव आयोग के खिलाफ धरने की अनुमति मांगी थी लेकिन अमित शाह की दिल्ली पुलिस ने सुरक्षा का घिसा-पिटा बहाना बनाकर अनुमति देने से इनकार कर दिया.

10 अक्टूबर की सुबह जो हुआ उसने साबित कर दिया कि देश में दूसरी इमरजेंसी से भी बदतर हालात हैं. सुबह-सुबह ध्रुवराठी को गिरफ्तार कर लिया गया, करीब 11 बजे अभिजीत दीपके और सौरभ दास जैसे CJP के बड़े नेताओं को उठा लिया गया और साथ ही 1000 से ज्यादा लोगों को हिरासत में लिया गया. ये लोग आतंकवादी नहीं थे, ये वही आम नागरिक थे जो चुनाव आयोग से SIR और वोट चोरी पर सवाल पूछने जा रहे थे. जब सांसदों को संसद से सड़क पर घसीट कर बसों में भरा जा रहा है तो आम जनता की क्या औकात है? पूरी दिल्ली को छावनी में तब्दील कर दिया गया है. सवाल यह है कि सरकार ने कुछ गलत नहीं किया तो इतना डर क्यों?

असल में यह लड़ाई सिर्फ विपक्ष या सीजेपी के लोगों की नहीं है बल्कि यह अब पूरी तरह आम जनता का आंदोलन बन गया है. इसमें मजदूर है जिसके पसीने की कोई कीमत नहीं, व्यापारी हैं जिन्हें GST ने निचोड़ लिया, किसान है जो 2020-21 में कीलों और कंटीले तारों के बीच दिल्ली के बॉर्डर पर बैठा रहा, स्टूडेंट है जिसका हर पेपर लीक हो रहा है और वो दुकानदार हैं जिसे नोटबंदी से लेकर GST तक हर कदम पर लूटा गया. इस आंदोलन में देश की चिंता करने वाले वकील, जज, प्रोफेसर और रिटायर्ड अफसर भी शामिल हैं क्योंकि सबको दिख रहा है कि लोकतंत्र को हाईजैक कर लिया गया है. असल में तो अब यह लड़ाई चंदा चोरों और वोट चोरों के खिलाफ है जिन्हें जनता अब बर्दाश्त करने के मूड में नहीं है.

पीएमकेयर, इलेक्ट्रोरल बॉन्ड जैसी लूट हो या राममंदिर की लूट सभी में बीजेपी शामिल रही है. इन्होने जीएसटी के नाम पर व्यापारियों को लूटा, गरीबों के बच्चे हायरएजुकेशन तक न पहुंच सके इसके लिए सरकारी स्कूलों को बर्बाद कर हर पेपर को लीक करवाया. पिछले 12 सालों में हर जगह हर विभाग और मंत्रालय में चोरी और लूट का सिलसिला चलता रहा. जिसका नतीजा यह हुआ की देश पर जो कर्ज 51 लाख करोड़ था वह 12 सालों में बढ़कर दो सौ लाख करोड़ से ऊपर पहुँच गया. देश की यह लूट हर पैमाने पर चलती रही. इंफ्रास्ट्रक्चर डवलपमेन्ट के नाम पर जनता के टैक्स के पैसों से जो निर्माण हुए सब भ्रष्टाचार, दलाली और लूट की भेंट चढ़ गये.

इस व्यापक लूट से भी जी नहीं भरा तो बीजेपी ने सत्ता में बने रहने के लिए लोकतंत्र को खोखला करना शुरू कर दिया और सीबीआई, ईडी और पुलिस की तरह 2023 में चुनाव आयोग को ही हाइजेक कर लिया. बीजेपी ने लोकतंत्र के सबसे जिम्मेदारी वाले पद पर ज्ञानेश कुमार के रूप में अपने एजेंट को फिट कर दिया. ज्ञानेश कुमार ने बीजेपी के लिए पूरी ईमानदारी और लगन से काम किया और वोट चोरी के नये नये तरीके ईजाद कर दिए जिससे हर राज्य में बीजेपी की सरकार बनने लगी.

10 अक्टूबर का जंतर-मंतर का प्रोटेस्ट बीजेपी के इसी व्यापक भ्रष्टाचार, चंदा चोरी, वोटचोरी और लूट के खिलाफ जन आक्रोश है. सरकार परमिशन रोक सकती है, धारा 144 लगा सकती है, दमन कर सकती है, जेलों को भर सकती है और लाठीचार्ज कर सकती है लेकिन अब इस जन-आक्रोश को रोक नहीं कर सकती.

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