Captain Smit Machhar: 30 सितंबर 2026, दुबई से तेल अवीव जा रही फ्लाईदुबई की फ्लाइट FZ1073 आसमान में हजारों फीट की ऊंचाई पर थी. विमान में 174 लोग सवार थे. सब कुछ सामान्य था, लेकिन अचानक ही विमान लड़खड़ाया और तेजी से कई फ़ीट नीचे आ गया. अचानक ही यह उड़ान एक ऐसी भयावह घटना में बदल गई, जिसकी कल्पना भी किसी ने नहीं की थी.

विमान के कॉकपिट में सह-पायलट ने भारतीय कैप्टन स्मित मच्छार पर हमला कर दिया था. वह विमान को पूरी तरह अपने कब्जे में करना चाहता था और इसलिए उसने कैप्टन स्मित की हत्या की कोशिश की. रिपोर्टों के मुताबिक उसने स्मित पर चाकू से कई वार किये. एक कुल्हाड़ीनुमा वस्तु, जिसे एमर्जेन्सी के वक्त दरवाजा खोलने के लिए विमान में रखा जाता है, उससे भी स्मित पर हमला किया. स्मित घायल होकर अपनी सीट से नीचे गिरे मगर उन्होंने हौसला नहीं छोड़ा और किसी तरह हमलावर को काबू में करते और खुद को बचाते हुए उन्होंने कॉकपिट का दरवाजा खोल कर शोर मचा दिया. इसी दौरान विमान तेजी से नीचे गिर रहा था. फ्लाइट-ट्रैकिंग आंकड़ों के अनुसार विमान लगभग 33 हजार फीट से करीब 17 हजार फीट तक नीचे आ गया. यानी चंद सेकंड में हजारों फीट की ऊंचाई गायब हो गई.

स्मित गंभीर रूप से घायल थे. शरीर से खून बह रहा था. सामने हमलावर था और पीछे विमान में बैठे 174 लोगों की जिंदगी. ऐसी स्थिति में कोई भी व्यक्ति अपनी जान बचाने के बारे में पहले सोचता मगर यात्रियों की जिंदगी कैप्टन के लिए ज्यादा महत्वपूर्ण थी. उन्होंने संघर्ष किया, हमलावर साथी का सामना करते हुए कॉकपिट का दरवाजा खोला और शोर मचाया. दरवाजा खुलते ही क्रू के सदस्यों ने अंदर पहुंचकर सह-पायलट को काबू में किया और दो अन्य पायलट जो उस दिन यात्री के रूप में विमान में मौजूद थे, उन्होंने तुरंत गिरते हुए जहाज को संभाला और आश्चर्जनक ढंग से उसकी सेफ लैंडिंग करवाई. विमान को सऊदी अरब के तबूक में आपातकालीन स्थिति में उतारा गया मगर बिलकुल सुरक्षित.

यह केवल एक विमान की आपात लैंडिंग की कहानी नहीं है. यह उस क्षण की कहानी है जब एक पायलट के सामने मौत खड़ी थी और पीछे 174 लोगों की जिंदगी बचाने का सवाल था. यदि उस वक्त कैप्टेन स्मित हिम्मत हार जाते और हमलावर साथी का मुकाबला न करते तो निश्चित ही विमान सैकड़ों लोगों की जलती चिता में तब्दील हो जाता. हो सकता है हमलावर विमान का अपहरण कर लेता या 9/11 जैसी किसी आतंकी घटना को अंजाम देता.

कैप्टन स्मित मच्छार फिलहाल अस्पताल में हैं मगर उनकी बहादुरी की गूंज भारत से लेकर दुनिया की अनेक देशों तक सुनाई दे रही है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें ‘हीरो’ बताते हुए कहा कि गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद उन्होंने अदम्य साहस और दूसरों की जान बचाने का संकल्प दिखाया. मोदी ने फ़ोन पर स्मित मछार से बात की. कैप्टन स्मित मच्छर ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को बताया कि जब दूसरा पायलट उन पर लगातार हमला कर रहा था, तब उन्होंने फर्श पर लेटे हुए कॉकपिट का दरवाजा खोल दिया था. उन्होंने कहा – उस समय मैं अपनी जान बचाने के लिए संघर्ष कर रहा था. मैं इतनी बुरी तरह घायल हो गया था कि गिर पड़ा था और मुझे याद है कि मैं सोच रहा था कि अगर मैं उठ नहीं पाया तो विमान में बैठे यात्रियों का क्या होगा. मुझे उस समय पता था कि मुझे बस धक्का देना है, दरवाजा ठीक वहीं था. फिर मैंने उसे खोल दिया और सभी लोग अंदर आ गए.

इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने भी कैप्टन मच्छार को “सच्चा हीरो” कहा. उन्होंने कहा कि घायल होने के बावजूद भारतीय पायलट ने मुकाबला किया, कॉकपिट का दरवाजा खोला और यात्रियों व क्रू को हमलावर पर काबू पाने में मदद की. वहीं अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी घटना पर टिप्पणी करते हुए कैप्टन की भूमिका की सराहना की है. हालांकि हमले के मकसद को लेकर जांच अभी जारी है और उसके बारे में अंतिम निष्कर्ष सामने नहीं आया है.

उल्लेखनीय है कि कैप्टन स्मित मच्छार मुंबई के रहने वाले हैं और इससे पहले स्पाइसजेट में भी काम कर चुके हैं. उनके पास बोइंग 737 पर हजारों घंटे का उड़ान अनुभव है. हादसे के बाद उन्हें सऊदी अरब के तबूक में अस्पताल में भर्ती कराया गया है. उनके उपचार की जानकारी भारतीय अधिकारियों ने साझा की जा रही हैं.

घटना की जांच जारी है. सवाल कई हैं. आखिर उस वक़्त ऐसा क्या हुआ कि स्मित पर सह-पायलट ने हमला किया. उसकी मंशा क्या थी? क्या आतंकी संगठनों ने हवाई सेवाओं के अधिकारियों का भी ब्रेनवाश कर उन्हें अपने नापाक मिशन का हिस्सा बना लिया है? क्या उसे इस्लामी कट्टरपंथी विचारधारा की शिक्षा दी गई थी? क्या हमला करने वाला पायलट विमान को किसी अन्य डायरेक्शन में ले जाने की कोशिश में था? आखिर वह किसके इशारे पर ऐसा करने वाला था? वह कॉकपिट में हथियार लेकर कैसे पहुंचा? उसके पास चाक़ू कहाँ से आया? वह स्मित मछार पर हमला करने की स्थिति में कैसे आया? हमले से पहले क्या उसकी स्मित से कोई बातचीत या झगड़ा हुआ? हवाई यात्रा करने वाले यात्री सुरक्षित रहें और भविष्य में ऐसी घटना दोबारा न हो, इसके लिए विमानन सुरक्षा व्यवस्था में क्या बदलाव जरूरी हैं? इन तमाम सवालों के जवाब आने में अभी समय लगेगा. फिलहाल दुनिया के सामने एक भारतीय पायलट की तस्वीर है – घायल, लहूलुहान, लेकिन हिम्मत न हारने वाला.

इस घटना पर एबीसी न्यूज़ ने लिखा है कि सूत्रों के मुताबिक हमलावर पायलट को सऊदी अरब से संयुक्त अरब अमीरात लाया गया था. वह ओमान का नागरिक है और उसका नाम हमाम अल-हमामी है. लेकिन उसकी पहचान से जुड़ी अन्य जानकारियां अभी स्पष्ट नहीं हैं.

घटना की जांच कर रहे अधिकारी अभी यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि संदिग्ध हमलावर को फ्लाईदुबई के लिए उड़ान भरने की अनुमति कैसे मिली और वह इजराइल जा रहे विमान के कॉकपिट में फर्स्ट ऑफिसर के तौर पर कैसे पंहुचा. जांच अधिकारियों को आशंका है कि उसका इरादा विमान को इजराइल में दुर्घटनाग्रस्त करने का था. कहा जा रहा है कि प्रतिबंध के बावजूद पायलट को फ़्लाईदुबई ने नौकरी पर रखा गया. उसे यूएई और इसराइल के बीच इस संवेदनशील मार्ग पर उड़ान भरने की अनुमति दी गई. इजराइल यह जांच कर रहा है कि पायलट ने यह सब अकेले किया या वह किसी और के साथ मिलकर काम कर रहा था. उसको कौन निर्देशित कर रहा था और हवाई सेवा में ऐसे कितने लोग घुस चुके हैं?

यह घटना बताती है कि धार्मिक कट्टरवाद कहाँ कहाँ तक अपनी जड़ें जमाता जा रहा है. इस घटना के सबसे गंभीर पहलू सिर्फ विमान में हुई हिंसा नहीं, बल्कि असल सवाल यह है कि अगर जांच में यह साबित होता है कि हमलावर के कट्टरपंथी विचार पहले से सुरक्षा एजेंसियों के संज्ञान में थे, तो वह दोबारा पायलट की नौकरी तक कैसे पहुंचा और संवेदनशील अंतरराष्ट्रीय मार्ग पर उड़ान भरने की अनुमति कैसे मिली? गौरतलब है कि जांच में यह बात सामने आयी है कि हमलावर पायलट को ओमान की राष्ट्रीय एयरलाइन की नौकरी से हटा दिया गया था. ऐसा उसके चरमपंथी विचारों को लेकर सामने आई चिंताओं के बाद किया गया था. यदि किसी पायलट के बारे में पहले से सुरक्षा संबंधी गंभीर आपत्तियां थीं, तो एयरलाइन की भर्ती प्रक्रिया, विमानन नियामक की निगरानी और सुरक्षा जांच, तीनों स्तरों पर क्या हुआ? यह सवाल केवल फ्लाईदुबई का नहीं है. यह दुनिया भर की नागरिक उड्डयन व्यवस्था के लिए बड़ा प्रश्न है. Captain Smit Machhar

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