Manipur Naga Community: नागा समुदाय का आरोप है कि राज्य में लंबे समय से सुरक्षा और प्रशासनिक व्यवस्था को लेकर उनकी परेशानियां अब जटिल हो चुकी हैं. नागा समुदाय अपने इलाकों में शांति, सुरक्षा और राजनीतिक अधिकारों की गारंटी चाहता है. मगर केंद्र सरकार उनके मुद्दों पर बात करने के लिए तैयार ही नहीं है.
मणिपुर में मई 2023 से मैतेई और कुकी समुदायों के बीच हिंसा के कारण अब तक सैकड़ों लोगों की मौत हो चुकी है और बड़ी संख्या में लोग विस्थापित हुए हैं. इस तनाव का असर नागा बहुल क्षेत्रों पर भी पड़ा है. अनेक जगहों पर अब नागा लोगों से हिंसक झड़पें हो रही हैं.
पूर्वोत्तर की सुरक्षा और भारत की क्षेत्रीय अखंडता के लिहाज से मणिपुर संवेदनशील इलाका है. केंद्र सरकार को चाहिए था कि वह सभी समुदायों के बीच भरोसा कायम करते हुए मणिपुर में स्थायी शांति की दिशा में प्रभावी कदम उठाती. मगर बीते तीन सालों में न तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और न ही गृहमंत्री अमित शाह ने मणिपुर जाने और लोगों का दर्द तक पूछने की जहमत उठाई.
केंद्र के रवैये से तंग अब नागा समुदाय चीन की शरण में जाने की बात कर रहा है. इम्फाल में तांगखुल अजे कटनाओ लोंग (TAKL) यानी सदर्न तांगखुल स्टूडेंट्स यूनियन के अध्यक्ष यारचुइसो काशुंग ने कहा है कि अगर सरकार सुरक्षा देने में नाकाम रही तो चीन समेत पड़ोसी देशों से मदद लेने के अलावा हमारे पास कोई विकल्प नहीं बचेगा.
काशुंग ने मणिपुर के मुख्यमंत्री पर भी निशाना साधा और कहा है कि अगर मुख्यमंत्री राज्य और उसके लोगों की सुरक्षा करने में सक्षम नहीं हैं. उन्हें इस्तीफा दे देना चाहिए. काशुंग के मुताबिक जब राज्य सरकार और केंद्र सरकार दोनों ही परवाह नहीं करते तो सीमा क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को ऐसा महसूस होता है कि वे न तो मणिपुर का हिस्सा हैं, न केंद्र सरकार का और न ही भारत का.
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