Social Media Impact On Youth: इस में ज्ञान देने वाली शिक्षिका काफी खूबसूरत है. वह खूबसूरत आवाज की मल्लिका है. वह युवाओं को अपने बोलने के अंदाज से अपनी ओर आकर्षित करती है. उस के द्वारा बताया जा रहा है कि लड़कियां खाली समय में अपने कपड़े उतार कर मोबाइल से स्वंय की न्यूड फोटो लेना ज्यादा पसंद करती हैं.

वह बताती है कि लड़कियां खुद की न्यूड तसवीरों को देख कर आनंदित और रोमांचित होती हैं, खुद के चिकने बदन को टटोलती है. इस के अलावा वे अकेले रहने पर अपने कोमल अंगों, जैसे वक्ष, नाभि, जी-स्पौट पर आहिस्ताआहिस्ता हाथ फिराना भी पसंद करती हैं. इस से उन में अलग तरह का एहसास होता है. उत्तेजना बढ़ने पर अपनी उंगलियों से चरमसुख प्राप्त करने की कोशिश करती हैं.

वह कहती है कि खाली समय में लड़कियों को बाथरूम में गंदी हरकतें करना अच्छा लगता है. यहां ध्यान देने की बात यह है कि इस प्रकार के ज्ञान से कोई भी लड़की पहले भले ही कुछ अलग कर रही होती है लेकिन इस वीडियो को देखने के बाद जरूर ऐसा करने के लिए प्रेरित हो सकती है.

इसी से मिलतेजुलते विषय पर आधारित उस शिक्षिका के अनेक वीडियोज फेसबुक पर देखने को मिल जाएंगे. हर विषय के लिए अलग वीडियो पोस्ट किया हुआ है. उन से संबंधित यहां उदाहरणस्वरूप कुछ सामग्री दी जा रही है. जैसे, क्यूट लड़की को पटाने के लिए क्या करना चाहिए? किन कामों से लड़की को ज्यादा इंप्रैस कर सकते हैं? अगर लड़की इशारे कर रही है तो सैट होना चाहती है. लड़की किन चीजों से बहुत जल्द लड़के को पटा लेती है. लड़कियां कैसे लड़कों के प्यार में जल्दी आ जाती हैं? लड़की के बारे में कैसे जानें कि वह आप से पट जाएगी या नहीं? लड़के को देख कर लड़की के मन में कैसेकैसे गंदे विचार आते हैं? इस तरह के वीडियो देखने और सुनने के बाद युवाओं के मन में, वैसे चाहे गंदे विचार न आते रहे हों, अब गंदे विचार जरूर आएंगे.

लड़की पहली मुलाकात में लड़कों के किस अंग को देखना ज्यादा पसंद करती है? लड़कियां कैसे लड़कों को देख कर ही उसे बौयफ्रैंड बनाने के बारे में सोचती हैं? लड़के को कैसे जानें कि वह इंप्रैस हो जाएगा? लड़की आप को पटाने के लिए ये हरकतें जरूर करेगी? आप को बौयफ्रैंड बनाने की उतावली लड़की ये गंदे इशारे जरूर करेगी.

इसी तरह के मिलतेजुलते विषय पर अनेक वीडियोज फेसबुक और इंस्टाग्राम पर देखे जा सकते हैं. अगर देखा जाए तो इन तरह के वीडियोज के नीचे सैकड़ों व्यूअर्स की प्रतिक्रिया, जैसे नाइस, वेरी नाइस, वंडरफुल, ब्यूटीफुल, कांग्रेचुलेशन, मस्त है, लगे रहो, आप कैसे पटोगी आदि लिखी देखी जा सकती हैं. तभी तो इस प्रकार के वीडियोज बनाने वालों और वीडियो डालने वालों के हौसले बुलंद हो रहे हैं. देखा जाए तो ऐसे वीडियोज से युवाओं को कितना लाभ हो सकता है, यह कहने की जरूरत नहीं है.

इसी प्रकार मिलतेजुलते सैकड़ों वीडियोज फेसबुक और इंस्टाग्राम पर ढूंढ़ने से मिल जाएंगे. यहां यह कहना गलत न होगा कि इस प्रकार के वाहियात ज्ञान देने की आड़ में इन युवाओं के लिए फूहड़ता और अश्लीलताभरी सामग्री परोसने काम किया जा रहा है. उन के अंदर सैक्स के प्रति विकृत मानसिक स्थिति बनाने में योगदान किया जा रहा है. जबकि हम सभी जानते हैं कि प्रेम एक आंतरिक भावना है और इसे इस प्रकार के वीडियो से पैदा नहीं किया जा सकता. हां, इन से युवाओं को दिग्भ्रमित जरूर किया जा सकता है.

बिहार के रोहतास जिले में कोचिंग चलाने वाले रंजन कुमार का कहना है, “सच पूछा जाए तो युवाओं को सही ज्ञान देने के बजाय उन्हें कामवासना से पीड़ित करने का काम किया जा रहा है. कुंआरे लड़केलड़कियां अपनी सैक्स इच्छा पूरी कैसे करते हैं? आज का युवावर्ग खाली समय में क्याक्या करता है? ऐसे अटपटे सवालों को ले कर इन फेसबुकिए टीचरों द्वारा खूब बढ़ाचढ़ा कर बताया व समझाया जा रहा है. अगर देखा जाए तो ऐसा लग रहा है कि सब से विश्वसनीय ज्ञान देने की जिम्मेवारी इन्हीं लोगों पर आ गई है. तभी इन तथाकथित गुरुओं का बोलबाला बढ़ रहा है.”

यह सत्य है कि कोरोना काल के पूर्व अनेक राष्ट्रीय स्तर की पत्रपत्रिकाएं, जो युवाओं के लिए उपयोगी सामग्री का नियमित प्रकाशन करती थीं, आज वे सभी पत्रपत्रिकाएं बाजार में बिकना लगभग बंद हो चुकी हैं. वे पहले बड़ेछोटे बाजारों से ले कर रेलवे स्टेशनों के व्हीलचेयरों पर काफी संख्या में दिख जाते थे. आज डिजिटल मोबाइल के कारण इन पत्रपत्रिकाओं की बिक्री लगभग नगण्य हो गई है.

आम आदमी मोबाइल पर इस प्रकार के वीडियो देख कर खुद को बहुत बड़ा ज्ञानी समझ बैठता है, जबकि हकीकत यह है कि मोबाइल द्वारा इस प्रकार के वीडियोज का प्रचारप्रसार बढ़ा कर युवाओं को उपयोगी सामग्री से वंचित किया जा रहा है.

कुछ प्रकाशक डिजिटल फौर्म में पत्रपत्रिकाएं निकाल कर औपचारिकताएं पूरी कर रहे हैं. सच्चाई यह है कि डिजिटल संस्करण के कारण पत्रपत्रिकाओं को खरीदार नहीं मिल पा रहे हैं. यही कारण है कि ये बहुउपयोगी पत्रपत्रिकाएं आम पाठकों की पहुंच से बहुत दूर होती जा रही हैं. कल तक शिक्षित परिवारों के बड़ेबुजुर्ग या पढ़ेलिखे लोग अपने बड़े होते बेटेबेटियों के लिए बाजार से खरीद कर उपयोगी पत्रपत्रिकाओं को उपहारस्वरूप देते थे जिस से लड़केलड़कियों को अपने जीवन के लिए महत्त्वपूर्ण मार्गदर्शन प्राप्त होता था, उन्हें प्रेरणा मिलती थी. सो, वे पत्रपत्रिकाओं को सहेज कर कर भी रखते थे.

पत्रपत्रिकाओं में प्रकाशित होने वाली उपयोगी सामग्री के लेखक देश के जानेमाने लेखक और पत्रकार हुआ करते हैं. वे उच्चशिक्षित और शोध की हुई सामग्री उपलब्ध कराते थे. आज भी उन की सामग्री पत्रपत्रिकाओं में प्रकाशित हो रही है. लेकिन पढ़ने वालों की तादाद बहुत कम हो गई है. अब लोग पत्रपत्रिका पढ़ने के बजाय मोबाइल पर तरहतरह के वीडियोज देख कर ज्यादा समय बिता रहे हैं और खुद को जबरदस्ती का ज्ञानी समझने लगे हैं.

कल तक व्यवसायिक पत्रपत्रिकाओं के प्रकाशक लेखकों और पत्रकारों को उचित पारिश्रमिक दे कर उन की भेजी गई रचनाओं को छापते थे. अब अधिकतर पत्रपत्रिकाओं के प्रकाशक स्वत्रंत लेखकों और पत्रकारों को पैसे देना बंद कर चुके हैं. जिस से स्वतंत्र लेखन करने वाले लेखकों और पत्रकारों में भी निराशा पनपी है.

वैसे, इस प्रकार डिजिटल मीडिया के उदय के कारण व्यवसायिक पत्रकारिता को भी काफी नुकसान हुआ है लेकिन समझदार लोग आज भी पत्रपत्रिकाएं नियमित रूप से खरीद रहे हैं और पढ़ रहे हैं. भले ही इन पत्रपत्रिका पढ़ने वालों की संख्या कम हो गई है लेकिन वे जानते हैं कि पत्रिकाओं में छपने वाले आलेख, आर्टिकल, कहानी, कविता विश्वसनीय और अनुभव की कसौटी पर आजमाएं हुए होते है. सो, पत्रपत्रिकाओं में छपी जानकारियां मनोरंजक और विश्वसनीय के साथसाथ ज्ञानवर्धक भी होती हैं.

आज जब मैं ने एक लेखक के रूप में कुछ युवाओं से इस विषय पर बैठ कर बातचीत किया तो उन अधिकतर युवाओं ने स्वीकार किया कि आज का युवावर्ग मोबाइल पर पढ़ाईलिखाई करने के नाम पर अश्लील वीडियो देखने का आदी हो चुका है. कुछ लड़केलड़कियों को इस प्रकार के वीडियोज देखने की लत सी हो गई है. इसीलिए उन की पढ़ाईलिखाई नहीं हो पा रही.

पटना के एक कालेज में पढ़ाई करने वाले युवा अनुज कुमार का कहना है, “मोबाइल पर मिलने वाले अधिकतर वीडियोज समय बरबाद करने वाले होते हैं जिन से लाभ कम और युवाओं को नुकसान ज्यादा हो रहा है. उन की पढ़ाई भी बाधित हो रही है. ऐसे सामग्री से युवाओं को दूरी बना कर रखना चाहिए और अच्छी पत्रपत्रिकाएं पढ़नी चाहिए जिस से उन्हें सही ज्ञान मिल सके.” Social Media Impact On Youth

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