Superstition: 21वीं सदी में मैडिकल साइंस काफी तरक्की कर चुकी है, फिर भी लोग गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए अस्पतालों और डाक्टरों के बजाय बाबाओं के दरबार में पहुंच रहे हैं. सोशल मीडिया पर ऐसे कई बाबा नजर आते हैं, जो दावा करते हैं कि उन के हाथ लगाते ही बीमारी ठीक हो जाती है.
हैरानी की बात यह है कि इन दावों को सुन कर लोग न सिर्फ उन पर विश्वास करते हैं, बल्कि पूजापाठ करते हैं और इलाज के नाम पर पैसे भी खर्च करते हैं. सब से बड़ा सवाल यह है कि अगर सिर्फ हाथ लगाने से बीमारी ठीक हो सकती है तो अस्पतालों में डाक्टर, जांच और दवाइयों की जरूरत ही क्यों? क्या कैंसर, डायबिटीज, हृदय रोग या दूसरी गंभीर बीमारियां सिर्फ किसी बाबा के आशीर्वाद से ठीक हो सकती हैं?
आस्था रखना किसी की निजी पसंद हो सकती है, लेकिन आस्था के नाम पर इलाज को नजरअंदाज करना खतरनाक हो सकता है. बीमारी शरीर में होती है और उस का कारण समझने के लिए जांच और सही चिकित्सा जरूरी है.
इस वीडियो को shyamjimanaunawale नाम के पेज से इंस्टाग्राम पर शेयर किया गया है जिस में 40 हजार लाइक्स हैं. इस अकाउंट के 16 लाख फौलोअर्स हैं.
फ्री का खाना और कंटैंट
सोशल मीडिया पर इन दिनों बच्चों का एक ऐसा ग्रुप नजर आता है कि जब वे रोज किसी न किसी की मदद से खाने की पार्टी करते दिखाई देते हैं. बताया जाता है कि उन के फौलोअर्स में से कोई एक व्यक्ति उन्हें पैसे देता है और अगले दिन उन्हीं पैसों से बच्चे जम कर खाना खाते हैं. देखने में यह सब मजेदार और मासूम लग सकता है, लेकिन इस के पीछे एक गंभीर सवाल छिपा है कि क्या इन बच्चों का बचपन और भविष्य कहीं मुफ्त के खाने के चक्कर में फंस तो नहीं रहा?
बच्चों के लिए अच्छा खाना, घूमनाफिरना और मौजमस्ती जरूरी है, लेकिन उस से भी ज्यादा जरूरी है उन की पढ़ाई, अनुशासन और भविष्य की तैयारी. अगर कम उम्र में उन्हें बिना मेहनत के पैसा और खाना मिलने लगे, तो धीरेधीरे मेहनत करने की आदत और पढ़ाई में रुचि कम हो सकती है. आज जिस चीज को वे मजाक और मनोरंजन समझ रहे हैं, वही कल उन की आदत बन सकती है.
सोशल मीडिया पर surajkaju10k के नाम से बने इस अकाउंट पर बच्चे अपनी रील पोस्ट करते हैं. इन के 30 हजार फौलोअर्स हैं. यह लोकप्रियता भी बच्चों को यह भ्रम दे सकती है कि लाइक्स, फौलोअर्स और मुफ्त की चीजें ही सफलता हैं. जबकि असली सफलता शिक्षा, हुनर और मेहनत से मिलती है. इन बच्चों की मदद करनी है तो उन्हें रोज खाना खिलाने के बजाय पढ़ाई, किताबें, शिक्षा और बेहतर भविष्य की दिशा में सहयोग देना चाहिए. Superstition





