Education System: सैंचुरीज तक देश के प्रीस्टों ने बोलने पर अपनी मोनोपोली बना रखी थी. सारी कहानियां वे ही अपने संस्कृत स्क्रिप्चर्स से पढ़ कर सुनाते थे और लोगों को मूर्ख बनाते थे. आज यह मोनोपोली टूट गई है. अब सही या गलत या एकदम कोरी गप करने के लिए मोबाइल काफी है. इसी से अब राजस्थान ही नहीं हरियाणा, उत्तर प्रदेश, मध्यप्रदेश के स्कूलों का कच्चा चिट्ठा खोला जा रहा है.

सोशल मीडिया अभी तक तो सिर्फ डांस दिखाता था या फूहड़ ऐक्टिंग, अब स्कूलों, सरकारी स्कूलों की टूटी छतें, फैले कमरे, गंदे बाथरूमों, सोते टीचर्स, तोंदुल प्रिंसिपलों के फोटो दिखाने लगा है जो गरीबों के दुबलेपतले बच्चों को पढ़ाते कम, मारते ज्यादा हैं.

कई सरकारों ने वही किया जो सदियों से हिंदू प्रीस्ट करते रहे हैं. गलती निकालने वालों को एंटीनैशनल, सिक्योरिटी थ्रेट, बच्चों की प्राइवेसी का हनन, स्टेट पर उंगली उठाने का करेज दिखाने पर बैन कर दिया. पुलिस भी लगा दी गई है कि कोई सोशल मीडिया इंफ्लुएंसर स्कूल में न घुस पाए और यह न देख पाए कि स्कूल तो मैसों के साथ चल रहा है.

मजेदार बात यह है कि सोशल मीडिया पर एक भी टीचर ने यह नहीं कहा कि उसे सैलरी देर से मिल रही है, स्कूल का रिजल्ट बढिय़ा है, न पढ़ाने पर परेशान किया जा रहा है.

स्कूलों में घुसने पर बैन लगाने पर इंफ्लुएंसर्स ने ड्रोनों से शूटिंग शुरू कर दी है. स्कूलों की पोलपट्टी खुल कर सामने आने लगी है. एक ही स्कूल पर बीसियों वीडियो बनने लगे और हजारों पोस्ट उन से कौपी कर के डाली जाने लगी हैं. कौकरोच जनता पार्टी के कौकरोच पंडितों के हिट स्प्रे का जम कर मुकाबला कर रहे हैं.

सोशल मीडिया परपजफुल हो, यह पहली बार प्रूव हो रहा है. अब तक तो सोशल मीडिया या तो सिर्फ एंटरटेन करता था या रिलीजीयस लाइंस पर डिवाइड करने वाली पोस्टें डालता था.

सोशल मीडिया के लिए वीडियो/प्रोग्राम अब तो एआई से बनने लगे हैं और स्कूलों की बदहाली की पोस्टें जम कर वायरल हो रही हैं. बेचारे गुरुओं की बुरी हालत है. उन्हें गुरुदक्षिणा लेने की आदत है, जनता को कोई क्लैरिफिकेशन देने की नहीं. सैलरी उन का हक है और पढ़ाना उन के लिए औप्शन है. यह औप्शन छीन लिया गया तो सरकारी गुरु की नौकरी का एडवांटेज क्या ही रह जाएगा? Education System

 

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