Husband Wife Dispute: दिल्ली के साकेत कोर्ट में घरेलू हिंसा का एक मामला चल रहा था. पति मधुरेंद्र सिंह के खिलाफ उस की पत्नी ने घरेलू हिंसा की शिकायत की थी. इसी शिकायत का जवाब देते हुए मधुरेंद्र ने कोर्ट से मांग की कि उस की पत्नी के सीडीआर यानी कौल डिटेल रिकौर्ड को सुरक्षित रखा जाए. मधुरेंद्र का कहना था कि उस की पत्नी देररात कुछ मर्दों से रोजाना फोन पर बात करती है, इसलिए रिकौर्ड मिटने से पहले उन्हें सुरक्षित रखना जरूरी है.
मजिस्ट्रेट कोर्ट ने इस मांग को पहले ही खारिज कर दिया था. पति ने इस फैसले के खिलाफ सत्र अदालत में अपील की. एडिशनल जज शुनाली गुप्ता ने 25 जून, 2026 को यह अपील भी खारिज करते हुए साफ कहा- “सिर्फ देररात किसी पुरुष से फोन पर बात करने से महिला के चरित्र पर सवाल नहीं उठाया जा सकता. भारतीय समाज अब पिछड़ा नहीं रहा है, जहां पुरुष से बात करने वाली महिला को गलत समझा जाए.
“औरतें आज हर क्षेत्र में काम करती हैं, मल्टीनैशनल कंपनियों में मर्द कलीग या औफिस के दोस्तों के साथ संपर्क रखती हैं. यह सामान्य बात है. निजता के अधिकार में दखल के लिए ठोस सुबूत और उचित कारण जरूरी है. महज शक या देररात की बातचीत इस का आधार नहीं बन सकती. जब तक कोई गैरकानूनी या एक्स्ट्रा मैरिटल का ठोस सुबूत न हो तब तक ऐसी मांग स्वीकार नहीं की जा सकती.”
इस महत्त्वपूर्ण फैसले के साथ कोर्ट ने औरतों की आजादी को और बेहतर तरीके से समझाया है. आज भी कई घरों में औरतें पुरानी सोच का बोझ ढो रही है. पति या परिवार वाले तय करते हैं कि औरत को रात में किसी पुरुष से बात करनी चाहिए या नहीं. अगर कोई औरत रात में किसी से बात करे तो इस का मतलब यह निकाला जाता है की उस का चरित्र खराब है लेकिन दिल्ली के साकेत कोर्ट ने इस पुरानी सोच को चुनौती दी है.
यह फैसला बेहद महत्त्वपूर्ण है. घरेलू हिंसा के मामलों में अकसर पति पक्ष औरतों की पर्सनल लाइफ पर हमला करता है. कौल रिकौर्ड मांग कर, उस के दोस्तों पर शक कर के या चरित्र पर उंगली उठा कर उसे कमजोर करने की कोशिश की जाती है. इस फैसले में इसी मानसिकता को तोड़ते हुए औरत की निजता को महत्त्व दिया गया है.
इस फैसले की जितनी तारीफ की जाए कम है. न्याय सिर्फ कागजों पर नहीं होना चाहिए बल्कि दिखना भी चाहिए. एडिशनल जज शुनाली गुप्ता के इस फैसले में न्याय साफ नजर आता है. हर महिला को यह जानना चाहिए कि उस की आवाज सुनी जा रही है. रात में बात करने से, दोस्त बनाने से या अपनी जिंदगी अपनी मरजी से जीने से वह गलत नहीं होती. औरत भी इंसान ही है जिसे अपनी आजादी के साथ जीने का पूरा हक है.
आज औरतें बिना डरे काम कर सकती हैं, दोस्तों से बात कर सकती हैं और अपनी जिंदगी जी सकती हैं. समाज बदल रहा है. औरतें अब घर की चारदीवारी में कैद नहीं हैं. वे बाहर निकल कर पढ़ रही हैं, नौकरी कर रही हैं और मर्दों के बराबर काम कर रही हैं. ऐसी स्थिति में रात में फोन पर बात करना कोई अपराध नहीं बल्कि सामान्य जीवन का हिस्सा है. एक मर्द रात में किसी से भी बात करे, उस पर कोई उंगली नहीं उठाता लेकिन यही काम औरत करे तो वह गलत कैसे? औरतों को हर मामले में मर्दों जितनी ही आजादी मिलनी चाहिए. किसी भी औरत का चरित्र सिर्फ रात की बातचीत या दोस्ती से नहीं तय होता. चरित्र पर सवाल उठाना असल में औरतों को कंट्रोल करने का मर्दवादी हथियार ही है. इस फैसले ने उस हथियार को तोड़ दिया है. Husband Wife Dispute




