Russia Ukraine War: रूस और यूक्रेन की जंग अब सिर्फ जमीन, मिसाइल, टैंक और सैनिकों की जंग नहीं रह गई है. यह एक ऐसा युद्ध बन चुका है जिसमें रूस और उक्रेन की अर्थव्यवस्था चरमरा गई है और हथियार खरीदने के लिए लगातार पैसों की जरूरत पड़ रही है. युद्ध के इतने लंबे खिंच जाने के बाद उक्रेन की हालत तो पूरी तरह खस्ता हो चुकी है. ऐसे बुरे हालात से निपटने के लिए यूक्रेन ने जो कदम उठाया है वह पूरी दुनिया में चर्चा का विषय बन गया है.
उक्रेन जल्द ही एडल्ट कंटेंट यानी पोर्नोग्राफी के कारोबार को कानूनी दायरे में लाकर उससे टैक्स वसूलने का रास्ता अपनाने जा रहा है. इस प्रस्ताव के पीछे सरकार का तर्क यह है कि देश में यह कारोबार पहले से मौजूद है, लोग इंटरनेट पर इससे पैसा कमा रहे हैं. सरकार को इससे टैक्स मिल सकता है तो इस पैसे का इस्तेमाल युद्ध के लिए क्यों न किया जाये? उक्रेन के कुछ सांसदों ने अनुमान लगाया है कि इससे सालाना करोड़ों डॉलर का टैक्स मिल सकता है और इस टैक्स से लाखों ड्रोन खरीदे जा सकते हैं. यहां सवाल यह है कि युद्ध आखिर समाज को किस दिशा में ले जा रहा है? और सरकारें युद्ध की खातिर पैसा जुटाने के लिए आखिर किस सीमा तक जा सकती हैं? उक्रेन लम्बे समय से युद्ध के कारण आर्थिक संकट में है. बेरोजगारी लगातार बढ़ रही है ऐसे में अगर सरकार पोर्न इंडस्ट्री से पैसा कमाने की सोच रही है तो गरीब और बेरोजगार युवाओं पर इसका क्या असर पड़ेगा?
किसी अमीर व्यक्ति के लिए अपनी इच्छा से एडल्ट कंटेंट बनाना और किसी आर्थिक तौर पर मजबूर शक्श का अपनी जरूरत पूरी करने के लिए वही काम करना दो बिल्कुल अलग परिस्थितियां हैं. आंकड़ों में दोनों को सहमति कहा जा सकता है लेकिन आर्थिक मजबूरी के पीछे की संवेदना को समझे बिना उन्हें ऐसे रोजगार में झोंकना इंसानियत तो नहीं है.
यहां सवाल यह नहीं है कि पोर्न सही है या गलत. सवाल यह भी नहीं है कि सेक्स को टैक्स का जरिया बनाया जाये या नहीं है? असली सवाल इंसान की स्वतंत्रता, उसकी गरिमा, उसकी आर्थिक मजबूरी और सरकार की जिम्मेदारी का है. अगर कोई बालिग़ व्यक्ति अपनी इच्छा से कोई काम करता है और किसी दूसरे व्यक्ति को नुकसान नहीं पहुंचाता तो सिर्फ धार्मिक नैतिकता के आधार पर उसे अपराधी नहीं कहा जा सकता लेकिन इसका दूसरा मतलब यह भी नहीं है कि हर उस काम को बढ़ावा दिया जाए जिससे पैसा कमाया जा सकता है.
हर नीति को उसके वास्तविक परिणामों के आधार पर देखा जाना चाहिए और यहीं सबसे बड़ा सवाल खड़ा होता है. अगर सरकार कहती है कि पोर्न इंडस्ट्री से टैक्स लेकर ड्रोन खरीदे जाएंगे और उनसे युद्ध लड़ा जाएगा तो क्या इससे दुनिया को यह संदेश नहीं जाएगा कि युद्ध के लिए नागरिकों की प्राइवेसी, उनके इमोशन्स और उनकी व्यक्तिगत आजादी को दांव पर लगाया जा सकता है? आज पोर्न इंडस्ट्री है. कल कोई दूसरा उद्योग हो सकता है. युद्ध अगर और लंबा चलता है तब कौन से नये रास्ते खोजे जायेंगे? क्या समाज की हर गतिविधि को आर्थिक संसाधन बना देना सही है? कल को प्रेगनेंसी का लाईवटेलीकास्ट और मौत का प्रसारण जैसी इंडस्ट्री भी ख़डी हो जाएगी और सरकार इनसे भी युद्ध के लिए पैसा कमाएगी.
किसी भी देश की आर्थिक नीति का लक्ष्य केवल यह नहीं होना चाहिए कि किसी भी तरह पैसा जुटाया जाए. सरकार का काम तो यह होना चाहिए कि वह ऐसे रोजगार पैदा करे जिनमें लोगों को अपनी आर्थिक मजबूरी के कारण अपने शरीर को बाजार में उतारने की जरूरत न पड़े.
अगर किसी देश में लाखों युवा बेरोजगार हैं और उनके सामने इंटरनेट पर एडल्ट कंटेंट बनाकर जल्दी पैसा कमाने का विकल्प मौजूद है तो कुछ लोग इस विकल्प को क्यों नहीं चुनेंगे? इसमें अपने आप कोई अपराध नहीं है लेकिन ऐसे में आर्थिक मजबूरी नैतिकता पर भारी पड़ जाएगी. जब किसी व्यक्ति के पास विकल्प ही कम हों तो उसकी सहमति के कोई मायने नहीं है ऐसे में केवल यह देखना काफी नहीं होगा कि उसने हां कहा या नहीं कहा. यह भी देखना होगा कि उसके पास दूसरा विकल्प क्या था?
यहां धर्म की मानसिकता को समझना भी जरुरी है. धर्म सेक्स को पाप और पुण्य के सवाल में बदल देता है लेकिन सच यही है कि सेक्स अपने आप में कोई पाप नहीं है और न ही पोर्न को सिर्फ इसलिए गलत कहा जा सकता है कि धर्म उसे गलत मानता है और पोर्न को केवल इसलिए सही भी नहीं कहा जा सकता कि उससे सरकार को टैक्स मिल सकता है.
केवल पैसे के नाम पर किसी काम को नैतिकता से अलग नहीं किया जा सकता. अगर किसी काम में शोषण, जबरदस्ती, तस्करी या आर्थिक मजबूरी शामिल है तो उससे पैसा आने के बावजूद उस व्यवस्था की आलोचना जरूरी है. इंसान को साधन बनाकर कमाया गया पैसा किसी भी राष्ट्र को मजबूत नहीं बना सकता. इस पूरे मामले में सबसे ज्यादा चिंता इस बात की होनी चाहिए कि युद्ध ने यूक्रेन के समाज और अर्थव्यवस्था को किस हालत में पहुंचा दिया है?
सरकारों का काम रोजगार पैदा करना, उद्योग बढ़ाना, शिक्षा सुधारना और जनता के हितों में भविष्य की योजना बनाना होता है लेकिन यह भी सच है कि युद्ध के दौरान सरकार का पहला लक्ष्य अपनी रक्षा करना हो जाता है. यूक्रेन के सामने रूस का खतरा है इसलिए उसे हथियारों और पैसों की जरूरत है. इस मजबूरी को समझा जा सकता है लेकिन मजबूरी को समझना और सरकार की हर नीति को सही मान लेना दो अलग अलग बातें हैं. युद्ध जरूरी हो सकता है लेकिन युद्ध के नाम पर पोर्न इंडस्ट्री को बढ़ावा देना जस्टिफाई नहीं हो सकता.
अगर पोर्न इंडस्ट्री से मिलने वाला पैसा युद्ध के लिए इस्तेमाल होगा तो क्या इससे युद्ध खत्म होने की संभावना बढ़ेगी या सिर्फ युद्ध की उम्र बढ़ेगी? क्या ज्यादा ड्रोन खरीदने से शांति जल्दी आएगी या दोनों तरफ हथियारों की दौड़ और लंबी होगी? क्या सरकार का लक्ष्य सिर्फ अगले साल के युद्ध का खर्च जुटाना होना चाहिए या ऐसा रास्ता निकालना भी होना चाहिए जिससे युद्ध खत्म हो और देश के युवाओं को फिर से सामान्य जीवन मिल सके और उन्हें इज्जत वाला रोजगार मिल सके. किसी देश की असली ताकत उसके पास मौजूद ड्रोन की संख्या नहीं होती. उसकी असली ताकत उसके युवा होते हैं. जिन्हें उनके स्किल के हिसाब से रोजगार मिलना चाहिए न की उन्हें सेक्स इंडस्ट्री में जबरन धकेलना चाहिए. Russia Ukraine War





