Gen Z: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत 6 अगस्त को मुंबई में देशभर से आए लगभग 2,000 जेनअल्फा और जेनजी विद्यार्थियों के साथ संवाद किया. इस कार्यक्रम को युवाओं से संवाद स्थापित करने की एक महत्त्वपूर्ण पहल के रूप में देखा जा रहा है.

कौकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने इस पहल का स्वागत तो किया मगर भागवत की उफनती उम्मीदों को यह कह कर ठंडा कर दिया है कि यदि युवाओं से बातचीत उन की ही पीढ़ी के लोग करें तो उस का प्रभाव कहीं अधिक होगा.

अपने गृहनगर छत्रपति संभाजीनगर में पत्रकारों से बातचीत करते हुए अभिजीत दीपके ने कहा कि युवाओं के साथ संवाद करना सकारात्मक कदम है, लेकिन केवल संवाद पर्याप्त नहीं है. युवाओं के मुद्दों पर निर्णय लेने और संवाद करने वाले मंचों पर भी युवाओं की भागीदारी सुनिश्चित होनी चाहिए.

उन्होंने कहा- “यह अच्छी बात है कि संवाद हो रहा है, लेकिन इस से भी बेहतर होगा कि इस संवाद का चेहरा भी युवा हो.”

अभिजीत ने कहा कि यदि 70-80 वर्ष की आयु के लोग युवाओं से बात करेंगे तो वह उपयोगी हो सकता है, लेकिन जेनजी अपनी ही पीढ़ी के लोगों के अनुभव और नेतृत्व से अधिक जुड़ाव महसूस करती है. पिछले कुछ महीनों में युवाओं के आंदोलनों ने सरकार और विभिन्न संगठनों को यह एहसास करा दिया है कि नई पीढ़ी को नजरअंदाज करना संभव नहीं है.

उन्होंने कहा- “युवाओं ने उन्हें (संघ और सरकार) मजबूर किया है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को इंस्टाग्राम पर रील डालनी पड़ रही है और मोहन भागवत भी जेनजी से संवाद करना चाहते हैं. देर से सही, लेकिन अब उन्हें समझ में आया है कि इस पीढ़ी से बात करनी ही पड़ेगी.” अभिजीत का संकेत हाल के छात्र आंदोलनों और सोशल मीडिया पर युवाओं की बढ़ती राजनीतिक सक्रियता की ओर है.

मोहन भागवत का जेनजी से संवाद और अभिजीत दीपके की प्रतिक्रिया यह संकेत देती है कि भारत की राजनीति में युवाओं की भूमिका लगातार बढ़ रही है. विभिन्न राजनीतिक और सामाजिक संगठन अब यह महसूस कर रहे हैं कि केवल युवाओं के बारे में बात ही करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि अब उन्हें नेतृत्व और प्रतिनिधित्व भी देना होगा.

अभिजीत की बातों से निश्चित ही मोहन भागवत को गहरा झटका लगेगा. अब देखना दिलचस्प होगा कि भागवत के आह्वान पर जेनजी और जेनअल्फा के कितने युवा उन की बात को गंभीरता से लेते हैं. Gen Z

 

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