Gen Z Protest: कभी आंदोलन का मतलब होता था एक ऊंचे मंच पर धरना, नारे और लंबेलंबे भाषण. आज के जेनजी ने इस परिभाषा को पूरी तरह बदल दिया है. अब विरोध सिर्फ सड़कों पर नहीं, इंस्टाग्राम की रीलों, एक्स की पोस्टों, मीम्स, रैप, वायरल वीडियो और तंजभरे कैप्शन में हो रहा है.

सरकार में बैठे 60 से ऊपर के बूढ़े नेता सोचे रहे थे कि छात्रों के पिछवाड़े पुलिस के चार डंडे पड़ेंगे और सारा प्रदर्शन ठंडा पड़ जाएगा, लेकिन उन्हें अंदाजा नहीं था कि इस बार मुकाबला उस जेनजी से है जो हर लाठीचार्ज को मीम बना रहे हैं, हर आंसूगैस को रील का बैकग्राउंड और हर सरकारी बयान को इंटरनैट का नया मजाक. तभी तो कौकरोच जनता पार्टी का आंदोलन देखतेदेखते जंतरमंतर से निकल कर पूरे सोशल मीडिया पर छा गया.

एक विकलांग लड़का अपने दिव्यांग वाहन पर धरना स्थल पर पहुंचा था और रील बना कर हंसता हुआ बोला- ‘मैं भी पहुंच ही गया साला इन की मां…’

20 जुलाई को जब प्रदर्शनकारियों को संसद की ओर बढ़ने से रोकने के लिए पुलिस ने लाठीचार्ज और आंसूगैस का इस्तेमाल किया, तब शायद किसी ने नहीं सोचा होगा कि कुछ ही मिनटों में वे दृश्य सोशल मीडिया पर लाखों लोगों के मनोरंजन और राजनीतिक चर्चा का विषय बन जाएंगे. किसी ने ‘चक दे इंडिया’ के गाने पर भागते हुए वीडियो डाला, तो कोई ‘सबवे सर्फर’ का संगीत लगा कर बता रहा था कि पुलिस से बचने का असली अनुभव कैसा होता है.

एक वायरल वीडियो पर लिखा था- ‘थैंक्स फौर द कार्डियो, दिल्ली पुलिस’ यानी सरकार ने फिटनैस अभियान को नया रूप दे दिया. व्यंग्य की यही ताकत है कि वह वहां भी चोट कर देता है जहां लंबे भाषण असर नहीं कर पाते. सोशल मीडिया पर धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को ले कर खूब चुटकियां ली जा रही थीं. किसी ने लिखा कि ‘देश में नौकरियां इतनी कम हैं कि शायद मंत्री जी को दूसरी नौकरी नहीं मिल रही, इसलिए इस्तीफा नहीं दे रहे हैं.’

एक ने लिखा- ‘शायद महीने की सैलरी आने का इंतजार है, ताकि ‘फुल एंड फाइनल सैटलमैंट’ में नुकसान न हो.’ यह हास्य सिर्फ मनोरंजन नहीं है बल्कि सरकार की जवाबदेही पर सवाल उठाने का नया तरीका है.

दिलचस्प बात यह है कि यह आंदोलन सिर्फ नारों तक सीमित नहीं रहा. युवा प्रदर्शनकारी ‘गेट रैडी विद मी’ और ‘आउटफिट औफ द डे’ जैसी रीलें बना कर प्रदर्शन में पहुंच रहे हैं. एक युवती ने अपने वीडियो में लिखा- ‘आज सरकार के पतन का गवाह बनने जा रही हूं. मैं ने पहन रखी है अपनी रीढ़ की हड्डी, झुमके और संवैधानिक अधिकार.’ दूसरी ने कहा कि उस का मेकअप पूरे दिन नहीं बिगड़ा क्योंकि, ‘मेरा फाउंडेशन मजबूत है, सरकार की तरह नहीं.’

पर्यावरण को भी जेनजी ने व्यंग्य का हिस्सा बनाया. पुलिस द्वारा आंसूगैस छोड़े जाने पर एक पोस्ट में लिखा गया- ‘दिल्ली पुलिस, कृपया आंसूगैस मत छोड़िए. इस से प्रदूषण बढ़ता है, फिर हमें पर्यावरण मंत्री का भी इस्तीफा मांगना पड़ेगा.’

एक लड़के ने लिखा- ‘ई20 पैट्रोल में मिलावट हो सकती है, लेकिन आंसूगैस पूरी तरह शुद्ध निकली.’ एक लड़के ने पुलिस द्वारा फेंके गए आंसूगैस के गोले को उठा कर वापस पुलिस वालों के बीच उछाल दिया और फिर वह नजारा कई लोगों ने कैप्चर कर वायरल कर दिया जब पुलिस वाले अपनी आंखें रगड़ते हुए भागते देखे गए.

एक अन्य लड़के ने आंसूगैस के गोले के खोल को उठा कर उस की एक्सपायरी डेट देखी जो दिसंबर 2025 थी, वह हंसा और बोला- ‘यार, चीज तो ठीक लाया करो.’       मोदी सरकार की मुश्किल यह है यहां एक मीम कई बार पूरे सरकारी बयान पर भारी पड़ जाता है. जेनजी पीढ़ी राजनीतिक भाषणों से कम जबकि हास्य, व्यंग्य तथा रचनात्मक अभिव्यक्ति से ज्यादा प्रभावित होती है. इसलिए हर नया वीडियो, हर नई रील और हर नया मीम आंदोलन को और आगे बढ़ा रहा है.

प्रदर्शन में बैटमैन, स्पाइडरमैन, सुपरमैन और आयरनमैन जैसे किरदार भी दिखाई दिए. महात्मा गांधी और डा. भीमराव अंबेडकर की वेशभूषा में भी लोग पहुंचे हुए थे. संदेश साफ है- इस दौर का आंदोलन सिर्फ नारों से नहीं, प्रतीकों और दृश्य संस्कृति से चलेगा. हास्य का यह सिलसिला निजी जिंदगी तक भी पहुंच गया है. एक ने अपनी एक्स के बारे में लिखा- ‘आज आंसूगैस के धुएं में उन्हें याद कर के रो दिया.’ दूसरे ने कहा- ‘इतना इग्नोर तो उस ने भी नहीं किया था’ और एक प्रदर्शनकारी ने तो यहां तक कह दिया कि जो अब तक सिंगल हैं, उन्हें आंदोलन में जरूर आना चाहिए, शायद यहीं जीवनसाथी मिल जाएं.

यह सब देख कर सरकार के लिए चुनौती बढ़ गई. विरोध का यह नया रूप पारंपरिक राजनीति की समझ से बाहर है. यहां युवाओं के हाथ में सिर्फ पोस्टर नहीं, कैमरा भी है. सिर्फ नारे नहीं, मीम्स भी हैं. सिर्फ भाषण नहीं, वायरल रीलें भी हैं. सत्ता इसे हलके में ले या गंभीरता से, यह साफ है कि डिजिटल दौर में आंदोलन की भाषा बदल चुकी है.

लोकतंत्र में असहमति कोई नई बात नहीं है, लेकिन जेनजी ने यह दिखा दिया है कि विरोध हमेशा गुस्से में नहीं होता है. कभीकभी एक तीखा मजाक, एक वायरल वीडियो और एक मीम भी सत्ता से उतने ही असहज सवाल पूछ सकता है, जितने किसी लंबे भाषण या बड़े धरने से पूछे जाते हैं. और शायद यही वजह है कि आज सरकार को सिर्फ सड़कों पर नहीं, मोबाइल स्क्रीन पर भी बड़ी चुनौती दिखाई दे रही है. यही वजह है कि वह बारबार इंटरनैट बंद कर रही है, सेवाएं बाधित कर रही है. Gen Z Protest

 

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