Ethanol Blended Petrol: देश के नागरिकों से आत्मनिर्भरता का रास्ता अपनाने के लिए उसी तरह जोरजबरदस्ती की जा रही है जैसे मसजिदों को मंदिर घोषित करने के लिए की जाती रही है. पैट्रोल चूंकि विदेश से आता है, डौलर खर्च करने पड़ते हैं, इसलिए उस में जबरदस्ती शराब की तरह का एथेनौल मिला कर बेचा जा रहा है कि इस से अरब देशों को नुकसान होगा और देश के किसानों का भला होगा.

अब यह शोर मच रहा है कि परिवहन मंत्री नितिन गडकरी से जुड़ी एथेनौल बनाने वाली कई कंपनियां हैं जिन्हें फायदा पहुंचाने के लिए यह प्रपंच रचा जा रहा है. एथेनौल कोई सस्ता पड़ता हो, यह जरूरी नहीं क्योंकि इसे बनाने के लिए गेहूं, गन्ना, चावल आदि को शराब जैसी चीजें बनाने वाली डिस्टलरियों को सरकार घटे दामों पर बेच रही है. पैट्रोल में अभी 20 फीसदी एथेनौल मिलाया जा रहा है और उसे आत्मनिर्भरता का नारा जय श्री राम के नारे की तरह साथ में चपेट कर बेचा जा रहा है ताकि जनता आपत्ति न कर सके.

सोशल मीडिया पर जब तथ्य डाले जाने लगे कि इस से इंजन खराब हो रहे हैं और माइलेज कम हो रहा है तो सरकार ने पहले तो हमेशा की तरह इस बात से झूठा इनकार कर दिया पर फिर मान लिया कि कुछ गाड़ियों के इंजन एथेनौल के लायक नहीं है या कुछ गाडिय़ों में माइलेज कुछ कम मिला.

दुनिया के कुछ देशों में इस के प्रयोग हुए है पर वहां अनाज बहुतायत में होता है. भारत आज अनाज उत्पादन के मामले में खासा ठीकठाक है, इस में शक नहीं पर फिर भी खाने के तेल, दालें, फल, सब्जियों का खासा आयात भी होता है.

सो, अगर डौलर खर्च होने ही हैं तो पैट्रोल के लिए खर्च करने में क्या हर्ज है. यह प्रयोग उन देशों में बिलकुल नहीं किया जा रहा जहां औटोमोबाइल इंजन डिजाइन किए जा रहे हैं.

आज की सरकार हठधर्मी हो गई है क्योंकि उस के पास हर बात के उत्तर में कोई नारा होता है जो यहां की मूढ़ जनता स्कूलीकालेजी शिक्षा पा कर, मोबाइल से ज्ञान प्राप्त कर के सिर्फ जयजयकार करना ही सीख पाई है. सरकार ने कहा है कि एथेनौन से हम सुदृढ़ होंगे, सो सही ही होगा, आमजन में यह धारणा बैठाने में भगवा सरकार को कोई मुश्किल नहीं होती.

औटोमेकर्स आमतौर पर सही बात बताते नहीं हैं क्योंकि वे जानते हैं कि अगर उन्होंने सच बताया जो सरकार को नहीं भाया तो उन का बंद होना पक्का है. पैट्रोल कंपनियां या तो सरकार के हाथों में हैं या सरकार के इशारों पर चलती हैं. सरकार ने जनता से टैक्स के वसूले पैसे को एथेनौल बनाने वाली कंपनियों के ट्रकों में भर कर दिया है और तभी 2014 में जिस का इंडस्ट्रियल इस्तेमाल 421 करोड़ लिटर था, 2026 में 2,000 करोड़ लिटर हो गया है.

इथेनौल बनाने वाली कंपनियों के वारेन्यारे हो रहे हैं. हकीकत यह है कि जब तक देश में तेल के कुएं न मिलें या सौर्य ऊर्जा का पर्याय पक्का न हो, विदेशी निर्भरता बनी रहेगी, कुछ भाजपा नेता फायदे में रहेंगे, यह पक्का है. Ethanol Blended Petrol

 

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