Crime Stories: बेटी और बेटे की सूरत देख कर मांबाप के दिन मजे से कटते थे. समय वक्त के पहिए पर मद्धिम गति से आगे बढ़ता रहा. धीरेधीरे बच्चे बड़े होते गए. शर्मा दंपति की ख्वाहिश थी कि बच्चे पढ़लिख कर कोई अच्छी सी नौकरी करें, जिस से उन की जिंदगी मजे से कटे, किसी के सामने उन्हें हाथ न फैलाना पड़े.
स्नेहा के पापा की दिली ख्वाहिश थी कि बेटी पढ़लिख कर काबिल बने. उस की पढ़ाई से लेकर नौकरी लगने तक जो भी खर्च आएगा, उसे पूरा करने के लिए हाड़तोड़ मेहनत करेंगे.
इंसान का सोचा हुआ सच हो, ऐसा शायद ही कभी पूरा होता है. पता नहीं शर्मा दंपति के हंसतेखेलते परिवार को किस की बुरी नजर लगी कि परिवार बिखर गया. अचानक स्नेहा के पापा की मौत हो गई. परिवार की जिम्मेदारियां स्नेहा की मम्मी किरन देवी के कंधों पर आ गईं.
पति के सपनों को पूरा करने के लिए किरन देवी ने अपने हौसलों को बुलंद करने की कसम खा ली. सयानी हो चली बेटी स्नेहा की मैडिकल की पढ़ाई के लिए बैंक से बड़ी रकम का लोन लिया और भागलपुर के मैडिकल कालेज में स्नेहा का दाखिला करा दिया. वह नर्स की पढ़ाई करने लगी.
बेटी परिवार से दूर रहेगी, कैसे रहेगी? उस का समाचार कैसे मिलेगा? यह सोच कर किरन देवी ने बेटी को एक स्मार्टफोन भी खरीद कर दे दिया.
स्नेहा सुंदर और समझदार थी साथ ही चंचल भी. फोन मिलने के बाद वह घंटोंघंटों सोशल मीडिया पर जुटी रहती थी. उसी बीच फेसबुक पर नीरज कुमार यादव नाम के एक युवक ने स्नेहा को फ्रेंड रिक्वेस्ट भेजी. स्नेहा ने उस रिक्वेस्ट को एक्सेप्ट कर लिया.
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