Solo Trip: इंसान जब अकेले ट्रैवल करता है तो उस के साथ कोई साथी नहीं होता जिस पर वह निर्भर रह सके. हर छोटाबड़ा फैसला खुद को ही लेना होता है. इस से उक्त इंसान का आत्मविश्वास आसमान छूने लगता है. रोज़मर्रा की ज़िंदगी के शोर से दूर हो कर इंसान अपने विचारों, डर, इच्छाओं और सपनों से अकेले में बात कर पाता है. यह सोलो ट्रिप सैल्फडिस्कवरी का सब से बेहतरीन जरिया बन जाता है.
नई जगह, नए लोग, नई भाषा और नया खाना सबकुछ अनजाना होता है. हर दिन कंफर्ट जोन का दायरा छोटा होता जाता है और आप का व्यक्तित्व बड़ा और मजबूत बनता जाता है. सोलो ट्रिप पर जा कर ही पता चलता है कि इंसान खुद कितना अहम है, कितना योग्य है और असल में जिंदगी से वह क्या चाहता है.
कहीं अकेले खड़े हो कर रास्ता ढूंढ़ना, अजनबी से बातें करना, रात में अकेले घूमना या नया ट्रैक ट्राई करना आदि छोटीछोटी बातें इंसान को जीवनभर की ताकत दे जाती हैं और सोलो ट्रिप के सफर में मिला रोमांच तो, बस, बोनस बन जाता है. असली मज़ा तब आता है जब वापस लौट कर महसूस होता है कि सफर में वो हासिल कर लिया जिस की सख्त जरूरत थी.
आजकल टूरिस्ट एजेंसियां सोलो ट्रिप के लिए ढेर सारे आकर्षक प्लान ले कर आ रही हैं. हिमालय की वादियों से ले कर गोवा के बीच तक, राजस्थान के किले से ले कर केरल के बैकवाटर्स तक के पैकेज सिर्फ घूमने के नहीं होते बल्कि एक ऐसी यात्रा के होते हैं जहां आप खुद के साथ सब से ज्यादा वक्त बिताते हैं.
जब आप अकेले ट्रैवल करते हैं तो आप का दिमाग और दिल दोनों ज्यादा खुले रहते हैं. ग्रुप ट्रिप में आप अपने पुराने दोस्तों के साथ ही चिपके रहते हैं लेकिन सोलो ट्रिप आप को नए लोगों से जोड़ता है. बस में, होटल में या रैस्टोरैंट में आप के पास वाला शख्स आप से ‘हाय, कहां से हो?’ पूछता है और अगले ही पल आप दोनों साथ में लोकल स्ट्रीट फूड खा रहे होते हैं. 10-15 अजनबी एकसाथ ट्रेकिंग करते हैं. कैंप फायर के इर्दगिर्द बैठ कर कहानियां सुनतेसुनाते हैं और वापसी तक इन में से कई आप के अच्छे दोस्त बन चुके होते हैं.
जब आप अपने दोस्तों, विवाहित साथी, रिश्तेदार के साथ जाते हैं तो उन के हिसाब से चलना, खाना, देखना पड़ता है. सोलो ट्रिप में ट्रेन या बस में बगल वाला यात्री, कैफे में पड़ोसी टेबल पर बैठी अकेली लड़की या सनसेट पौइंट पर फोटो खिंचवाने वाला कोई अजनबी होता है. ये छोटेछोटे पल अकसर लाइफटाइम फ्रैंडशिप में बदल जाते हैं. कई ट्रैवलर्स बताते हैं कि सोलो ट्रिप में बने दोस्त सब से गहरे और ईमानदार होते हैं क्योंकि वहां कोई दिखावा नहीं होता, सिर्फ सच्चाई और साझा अनुभव होता है. सोलो ट्रिप की सब से रोमांचक बात यह है कि कई बार एक अजनबी से छोटी सी मुलाक़ात गहरे प्रेम में बदल जाती है.
एक लड़की स्पेन के बार्सिलोना में एक महीने रुकी. वहां एक लड़के से मिली जो खुद भी सोलो ट्रिप पर निकला था. दोनों ने साथ में शहर घूमा, फ्लेमेंको देखा, बीच पर वाइन पी. ट्रिप खत्म होने पर विदाई के आंसू बहाए लेकिन सोशल मीडिया पर कनैक्ट रहे. आज वो दोनों साथ हैं. मोंटेनेग्रो के एक होस्टल के रैस्टोरैंट में 2 सोलो ट्रैवलर्स की मुलाक़ात हुई. इस मुलाक़ात के 4 साल बीत चुके हैं और अब वे दोनों शादी करने वाले हैं.
भारत में ही कई लोग गोवा, रिषीकेश या लद्दाख में सोलो ट्रिप पर गए जहां उन्हें नए दोस्त मिले जिन्हें वे आज तक संजोए हुए हैं. कइयों को तो सोलो ट्रिप में अपना प्यार मिल गया. हालांकि, कई बार यह प्यार कुछ दिनों का होता है और बस खूबसूरत यादें छोड़ जाता है. तो वहीँ, कभी वह प्यार लंबा चलता है और रिश्ते में बदल जाता है. कई लोगों के लिए यह प्रेम सफर से शुरु हो कर सफर के अंत के साथ खत्म हो जाता है. ट्रिप खत्म होती है, रास्ते अलग हो जाते हैं. लेकिन यही इस प्रेम की खूबसूरती भी है जो बिना किसी एक्सपैक्टेशन के बस हो जाता है.
अगर आप नए दोस्त बनाना चाहते हैं, जीवन को करीब से जानना चाहते हैं और अकेले चैलेंज फेस करने का दम रखते हैं तो कंफर्ट जोन को छोड़िए और सोलो ट्रिप पर निकल जाइए. ज्यादातर एजेंसियां 20-35 साल के ग्रुप बनाती हैं. अगर आप 35 से 50 के बीच के भी हों तो भी ट्रैवल एजेंसियों से संपर्क करें या फिर बिना किसी एजेंसी के ही निकल जाइए. ग्रुप मिल जाएंगे.
होस्टल या होमस्टे में रुकें. ये सोशल स्पौट होते हैं. किसी से भी खुलेदिमाग से मिलें.
थोड़ी सावधानी भी जरूरी है
- बिना किसी ट्रैवल एजेंसी के सोलो ट्रिप में ठगी का खतरा हमेशा बना रहता है.
- सोलो ट्रिप में अगर प्रेम हो जाए तो एंजौय करें. एक्सपैक्टेशन कम रखें. ट्रैवल का रोमांस अकसर सिर्फ ट्रैवल तक का हिस्सा होता है, लाइफ का नहीं.
- सोलो ट्रिप सिर्फ घूमना नहीं है. यह खुद को एक्सप्लोर करने का जरिया भी है. सोलो ट्रिप पर लोग सिर्फ घूमने नहीं जाते बल्कि नए दोस्त बनाने और शायद एक अनकही प्रेम कहानी जीने भी जाते हैं.
आप की कोई सोलो ट्रिप वाली दोस्ती या प्रेम कहानी है तो ‘सरिता’ के साथ साझा जरूर करें. Solo Trip





